जालना महानगर पालिका पर नागरिकों का गुस्सा;“मीटिंग और निर्देश देना बंद करें, पहले शहर साफ करें!”

जालना/कादरी हुसैन
जालना महानगरपालिका के खिलाफ नागरिकों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। कुछ पार्षदों पर आरोप है कि वे चुनाव जीतने के बाद अपने-अपने वार्डों में दिखाई ही नहीं दिए। नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका सिर्फ बैठकों और निर्देशों तक सीमित रह गई है, जबकि ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस काम नजर नहीं आता।
आज शुक्रवार, 13 तारीख को दोपहर दो बजे प्राप्त जानकारी के अनुसार, जालना शहर में इस समय गंदगी का साम्राज्य फैल चुका है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं, नालियां जाम हैं और बदबू से लोग परेशान हैं। इस स्थिति को लेकर नागरिकों ने महापौर, उपमहापौर और पार्षदों पर तीव्र नाराज़गी जताई है। नागरिकों ने आक्रामक लहजे में कहा है—“सिर्फ मीटिंग और निर्देशों में समय न गंवाएं, सीधे सड़कों पर उतरें और शहर की सफाई करें।”
शहर के कई वार्डों में नालियां भरी हुई हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। कुछ इलाकों में हफ्तों से कचरा नहीं उठाया गया है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नागरिकों का आरोप है कि “महानगरपालिका केवल बैठकें करती है और आदेश जारी करती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर काम शून्य है।”
चुनाव से पहले किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ पार्षद तो चुनाव जीतने के बाद अपने वार्डों में आए ही नहीं। एक नागरिक ने नाराज़गी जताते हुए कहा, “वोट मांगने के लिए जो लोग दरवाजे-दरवाजे आते थे, वे अब दिखाई नहीं देते।”
नागरिकों ने प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग की है—तुरंत सफाई कर्मचारियों को मौके पर भेजकर नालियों, गटरों और कचरे की सफाई कराई जाए। अन्यथा आंदोलन करने की चेतावनी भी दी गई है।
शहर को स्वच्छ रखना महानगरपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है। केवल मीटिंग्स और कागजी आदेशों से समस्याएं हल नहीं होतीं। अब समय आ गया है कि दिए गए आश्वासनों को जमीन पर उतारकर ठोस काम करके दिखाया जाए—यही तीव्र भावना नागरिकों में देखने को मिल रही है।