इस्लामिक शिक्षा के दूरदर्शी मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी का निधन, देश ने खोया एक महान शिक्षाविद्

अक्कलकुवा: देश के प्रख्यात इस्लामिक विद्वान, शिक्षाविद् और समाज सुधारक मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी का शनिवार, 4 मई 2025 को महाराष्ट्र के अक्कलकुवा में निधन हो गया। वे 74 वर्ष के थे। मौलाना वस्तानवी का जन्म 1 जून 1950 को गुजरात के सूरत जिले के वासन गांव में हुआ था।
मौलाना वस्तानवी ने पारंपरिक इस्लामी शिक्षा को आधुनिक विज्ञान, चिकित्सा और तकनीकी ज्ञान से जोड़ने के लिए अपना जीवन समर्पित किया। वे महाराष्ट्र के अक्कलकुवा स्थित जामिया इस्लामिया इशातुल उलूम के संस्थापक और रेक्टर थे। उनके नेतृत्व में यह संस्थान न केवल इस्लामिक बल्कि आधुनिक शिक्षा का भी एक प्रमुख केंद्र बन गया।
उनकी दूरदर्शिता का सबसे उल्लेखनीय उदाहरण है IIMSR — भारतीय चिकित्सा विज्ञान और अनुसंधान संस्थान, जिसकी स्थापना उन्होंने की। यह भारत का पहला अल्पसंख्यक-संचालित मेडिकल कॉलेज बना जिसे मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) से मान्यता प्राप्त हुई। उन्होंने यह सिद्ध किया कि धार्मिक शिक्षा और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान एक साथ चल सकते हैं।
वर्ष 2011 में उन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित इस्लामी शिक्षण संस्थानों में से एक दारुल उलूम देवबंद का कुलपति (मोहतमिम) नियुक्त किया गया। हालांकि, संस्था के भीतर कुछ विचारधारात्मक मतभेदों के चलते उनका कार्यकाल लंबा नहीं चल सका, लेकिन उनकी नियुक्ति को मदरसा शिक्षा में सुधार और आधुनिकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना गया।
मौलाना वस्तानवी अपने विचारों में प्रगतिशील थे। वे इस्लामी परंपराओं के प्रति आस्था रखते हुए भी समाज को वैज्ञानिक सोच, चिकित्सा शिक्षा और आधुनिक ज्ञान से जोड़ने की वकालत करते रहे। उनके निधन से मुस्लिम समुदाय और शिक्षा जगत को अपूरणीय क्षति पहुँची है।
