औरंगाबाद: प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी के आरोप, लाभार्थियों में नाराज़गी; 1 लाख डिपॉजिट ने बढ़ाई चिंता

औरंगाबाद/प्रतिनिधि
औरंगाबाद में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शहर के हजारों लाभार्थियों ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए नाराज़गी जाहिर की है। लाभार्थियों का आरोप है कि उन्हें उनकी पसंद के स्थान पर घर नहीं दिए गए, वहीं भारी-भरकम डिपॉजिट की शर्त ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2016 में गरीबों को घर देने की घोषणा के बाद औरंगाबाद शहर के हजारों जरूरतमंदों ने आवेदन किए थे। लोगों को उम्मीद थी कि अब किराए के मकान की परेशानी खत्म होगी और उन्हें अपना घर मिलेगा। लेकिन कई वर्षों के इंतजार के बावजूद लाभार्थियों को अब तक घर नहीं मिल पाया था।
लंबे समय बाद प्रशासन ने शहर के हर्सूल, पडेगांव, तीसगांव और सुंदरवाड़ी क्षेत्रों में जमीन तय कर निर्माण प्रक्रिया शुरू की। वर्ष 2025 में पात्र लाभार्थियों की सूची जारी की गई और 2026 में घरों का निर्माण कार्य शुरू हुआ। महानगरपालिका द्वारा लाभार्थियों को एसएमएस के जरिए सूचनाएं भेजी जा रही हैं।
महापालिका ने लकी ड्रॉ प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन 5200 रुपये शुल्क लिया और लाइव लिंक के माध्यम से ड्रॉ दिखाया। कुल 11,120 घरों के निर्माण की योजना है, जिसमें 5177 लाभार्थी पात्र पाए गए और उनमें से 4778 को लकी ड्रॉ के जरिए चयनित किया गया।
हालांकि, बड़ी संख्या में लाभार्थियों का कहना है कि उन्हें उनकी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में घर नहीं मिला। कई लोगों ने हर्सूल और पडेगांव को प्राथमिकता दी थी, लेकिन उन्हें तीसगांव और सुंदरवाड़ी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में घर आवंटित कर दिए गए, जिससे वे निराश हैं।
लाभार्थियों ने यह भी आरोप लगाया है कि ड्रॉ प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और एक विशेष समुदाय के लोगों को उनकी पसंद के विपरीत स्थानों पर घर दिए गए हैं। इसको लेकर प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं और संभावित अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।
सबसे बड़ी चिंता 1 लाख रुपये के अनिवार्य डिपॉजिट को लेकर है। लाभार्थियों का कहना है कि कम आय, बच्चों की पढ़ाई, किराया और अन्य खर्चों के बीच इतनी बड़ी राशि एकमुश्त जमा करना संभव नहीं है। कई लोगों ने कहा कि वे 10 से 20 हजार रुपये तक का डिपॉजिट दे सकते हैं और बाकी रकम लोन लेकर चुका सकते हैं।
एक महिला लाभार्थी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि उन्होंने आवेदन में हर्सूल को पहली प्राथमिकता दी थी, लेकिन उन्हें सुंदरवाड़ी में छठी मंजिल पर घर मिलने का संदेश मिला। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी शहर में पढ़ती है और इतनी दूर जाना उनके लिए मुश्किल है। साथ ही 1 लाख रुपये डिपॉजिट की व्यवस्था करना भी उनके लिए बड़ी समस्या है।
वहीं, हर्सूल की एक अन्य महिला ने बताया कि उन्हें तीसगांव में घर मिला है, जो उनके लिए काफी दूर है। छोटे बच्चों के साथ वहां रहना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने प्रशासन से डिपॉजिट राशि कम करने और प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग की है।
बताया जा रहा है कि इन घरों का क्षेत्रफल 322.70 वर्ग फुट है और कीमत 9 लाख से 11.99 लाख रुपये के बीच है। हालांकि, लाभार्थियों को लगभग ढाई लाख रुपये की सब्सिडी मिलने से कीमत कुछ कम हो जाएगी।
फिलहाल, लाभार्थियों ने प्रशासन से डिपॉजिट की शर्त में राहत देने और उनकी पसंद के अनुसार घर आवंटित करने की मांग की है। वहीं इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
