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औरंगाबाद जिला केंद्रीय सहकारी बैंक चुनाव में संजना जाधव और समीर सत्तार को राहत, नामांकन फिर हुआ वैध

औरंगाबाद/प्रतिनिधि 

औरंगाबाद जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के संचालक मंडल चुनाव में विधायक संजना जाधव और समीर सत्तार के नामांकन पत्र खारिज होने के बाद राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई थी। हालांकि विभागीय सहनिबंधक के समक्ष हुई सुनवाई के बाद दोनों सहित कुल नौ उम्मीदवारों के नामांकन वैध घोषित कर दिए गए, जबकि केवल एक नामांकन को अमान्य ठहराया गया। इस फैसले के बाद जिला बैंक में विधायक अब्दुल सत्तार के प्रभाव को खत्म करने की कोशिशों को बड़ा झटका माना जा रहा है।

नामांकन जांच के दौरान समीर सत्तार का आवेदन अमान्य घोषित किए जाने पर विधायक अब्दुल सत्तार ने इस निर्णय को हास्यास्पद बताया था। उन्होंने दावा किया था कि अपील की सुनवाई में यह नामांकन निश्चित रूप से बहाल होगा। अब उनका दावा सही साबित हुआ है। समीर सत्तार और विधायक संजना जाधव के नामांकन वैध होने के बाद अब्दुल सत्तार ने चुनावी रणनीति को और तेज कर दिया है। उनका आग्रह है कि जिला बैंक के अध्यक्ष पद सहित सात संचालक पद शिवसेना के पास होने चाहिए।

सूत्रों के अनुसार जिला बैंक चुनाव में भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना का संयुक्त पैनल बनाने के लिए वरिष्ठ स्तर पर निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए मंत्री अतुल सावे, सांसद संदीपान भुमरे और पालकमंत्री संजय शिरसाट को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के 21 संचालक पदों के लिए कुल 214 नामांकन दाखिल हुए थे, जिनमें से जांच के दौरान 45 नामांकन खारिज कर दिए गए थे। इनमें अब्दुल सत्तार के पुत्र समीर सत्तार और कन्नड़ की विधायक संजना जाधव का भी समावेश था। दोनों ने विभागीय सहनिबंधक के समक्ष अपील दायर की थी। 17 जून 2026 को हुई सुनवाई के बाद उनके नामांकन वैध घोषित कर दिए गए।

समीर सत्तार ने कृषि एवं विपणन तथा व्यक्तिगत मतदाता संघ से नामांकन दाखिल किया था। उनके खिलाफ यह आपत्ति उठाई गई थी कि सोयगांव स्थित जिला बैंक की शाखा जिस भवन में संचालित होती है, वह उनकी निजी संपत्ति है और इसके बदले उन्हें बैंक से किराया प्राप्त होता है। इसी आधार पर चुनाव निर्णय अधिकारी ने महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम की धारा 57 के तहत उनका नामांकन अमान्य घोषित किया था।

अब्दुल सत्तार ने तर्क दिया था कि धारा 57 केवल उस स्थिति में लागू होती है जब कोई व्यक्ति संचालक बनने के बाद संस्था से लाभ प्राप्त करता है। नामांकन दाखिल करने के स्तर पर यह प्रावधान लागू नहीं होता। विभागीय सहनिबंधक ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए समीर सत्तार का नामांकन वैध करार दिया।

वहीं विधायक संजना जाधव ने विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी संस्था मतदाता संघ से नामांकन दाखिल किया था। नामांकन के साथ संस्था का अधिकृत प्रस्ताव प्रस्तुत न करने के कारण उनका आवेदन खारिज कर दिया गया था। बाद में अपील के दौरान उन्होंने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर त्रुटि दूर कर दी, जिसके बाद उनका नामांकन भी वैध घोषित कर दिया गया।

समीर सत्तार और संजना जाधव के नामांकन बहाल होने को शिवसेना के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब अब्दुल सत्तार जिला केंद्रीय सहकारी बैंक पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक सकते हैं।

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