औरंगाबाद PWD के मुख्य अभियंता अतुल चव्हाण के इस्तीफे से सियासत गरम, पुराने विवाद फिर चर्चा में

औरंगाबाद | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के मुख्य अभियंता अतुल चव्हाण के अचानक दिए गए इस्तीफे से मराठवाड़ा की राजनीति में हलचल मच गई है। कई लोगों का कहना है कि एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी राजनीतिक परिस्थितियों का शिकार हुआ है। वहीं दूसरी ओर उनके कार्यकाल के दौरान सामने आए विवाद और कथित अनियमितताओं के मामले भी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।
करीब 32 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के दौरान अतुल चव्हाण को उत्कृष्ट कार्य के लिए कई बार सम्मानित किया गया और उन्हें पदोन्नतियां भी मिलीं। हालांकि, उनके कार्यकाल में सामने आए कथित घोटालों और विवादों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
भाजपा की फुलंब्री विधानसभा क्षेत्र की विधायक अनुराधा चव्हाण के पति अतुल चव्हाण के इस्तीफा वापस लेने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन उन पर लगे आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। फरवरी 2026 में सामने आए 250 करोड़ रुपये के कथित फर्जी वर्क ऑर्डर घोटाले और QR कोड से जुड़े विवाद के कारण वे सुर्खियों में रहे थे।
आरोप है कि जिला नियोजन समिति द्वारा स्वीकृत विकास कार्यों के लिए फर्जी वर्क ऑर्डर जारी कर लगभग 250 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया। मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि QR कोड में हेरफेर कर एक व्यक्ति के नाम का QR कोड दूसरे के नाम की वर्क ऑर्डर पर लगाया गया। इस मामले में टेंडर क्लर्क, विभागीय लेखाधिकारी और कार्यकारी अभियंता की भूमिका पर भी सवाल उठे।
उस समय मुख्य अभियंता के रूप में अतुल चव्हाण की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई थी। हालांकि, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक अंबादास दानवे ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि विभाग के अधिकारियों द्वारा अपने ही विभाग की जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती। उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी।
फुलंब्री के सरपंच मंगेश साबळे ने भी PWD में कथित QR कोड घोटाले को दबाने का आरोप लगाते हुए अतुल चव्हाण के खिलाफ आंदोलन किया था। उनका आरोप था कि मुख्य अभियंता के निर्देश पर मामले को दबाया जा रहा है और विधायक की पत्नी होने का प्रभाव इस्तेमाल कर शिकायतकर्ताओं को धमकाया जा रहा है। उन्होंने जांच पूरी होने तक अतुल चव्हाण का मराठवाड़ा से बाहर तबादला करने की मांग भी की थी।
राजनीतिक बैनरों को लेकर भी हुआ था विवाद
अतुल चव्हाण उस समय भी चर्चा में आए थे जब विधायक अनुराधा चव्हाण के राजनीतिक कार्यक्रमों और प्रचार बैनरों पर उनका फोटो प्रकाशित किया गया था। इस पर उन्होंने स्वयं कार्यकर्ताओं को लिखित पत्र जारी कर सरकारी अधिकारी का फोटो राजनीतिक बैनरों पर न लगाने की अपील की थी। अपने पत्र में उन्होंने कहा था कि किसी सरकारी अधिकारी का राजनीतिक बैनरों पर फोटो प्रकाशित होने से उसकी निष्पक्षता और कार्यशैली पर सवाल उठते हैं तथा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत शिकायतें भी बढ़ती हैं।
फिलहाल अतुल चव्हाण के इस्तीफे ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था, राजनीतिक हस्तक्षेप और PWD से जुड़े पुराने विवादों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
