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औरंगाबाद नगर निगम में भाजपा के भीतर घमासान, पूर्व विधायक संजय केणेकर ने भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल

औरंगाबाद | प्रतिनिधि 

औरंगाबाद नगर निगम में सत्ता हासिल करने वाली भाजपा अब अपने ही नेताओं के निशाने पर आ गई है। भाजपा के पूर्व विधायक संजय केणेकर ने नगर निगम के कामकाज में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन के वादे पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम में अधिकारियों, ठेकेदारों और पीएमसी की एक भ्रष्ट गठजोड़ सक्रिय है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि नगर निगम आयुक्त किसी के दबाव में काम कर रहे हैं। इस बयान के बाद भाजपा के सत्ता पक्ष और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच अंदरूनी राजनीतिक खींचतान खुलकर सामने आ गई है।

कुछ दिन पहले भाजपा विधायक प्रशांत बंब ने भी प्रशासकीय कार्यकाल के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग की थी। अब पूर्व विधायक संजय केणेकर ने नगर निगम आयुक्त और महापौर समीर राजूरकर से मुलाकात कर वही मुद्दा दोहराया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

नगर निगम में भाजपा के 62 पार्षद होने के बावजूद अब तक हुई सामान्य सभा और स्थायी समिति की बैठकों में भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुखता से नहीं उठाया गया। न ही प्रशासकीय कार्यकाल के ऑडिट या जांच का कोई प्रस्ताव भाजपा पदाधिकारियों की ओर से रखा गया। इसे लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

नगर निगम में भाजपा की स्पष्ट बहुमत वाली सत्ता होने के बावजूद पार्टी के भीतर गुटबाजी और खेमेबंदी बढ़ती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार समर्थक पार्षदों के वार्डों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दिलाने, करीबी ठेकेदारों के भुगतान कराने और कार्यकर्ताओं के नगर निगम में पुनर्वास जैसे मुद्दों को लेकर नेताओं की सक्रियता लगातार बनी हुई है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इन मामलों में दबाव की राजनीति का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पार्टी के अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं।

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