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जालना नगर निगम की सामान्य सभा में दरगाह वेश हटाने के प्रस्ताव पर तीखी बहस, पार्षद फारूक टुंडीवाले ने उठाए संरक्षण और विकास कार्यों के मुद्दे

जालना | कादरी हुसैन

जालना नगर निगम की मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को आयोजित सामान्य सभा में कादराबाद स्थित हजरत जानुल्लाह शाह साहब कादरी (र.अ.) (मियां साहब दरगाह) के दरगाह वेश (प्रवेश द्वार/बेस) को हटाने के प्रस्ताव पर जोरदार बहस हुई। इस दौरान पार्षद फारूक टुंडीवाले ने मामले को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि संबंधित दरगाह वेश मियां साहब दरगाह की वक्फ संपत्ति का हिस्सा है। ऐसे में इसे ध्वस्त करने के बजाय आवश्यक मरम्मत कर संरक्षित किया जाना चाहिए।

पार्षद फारूक टुंडीवाले ने कहा कि यह केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने सुझाव दिया कि औरंगाबाद की तर्ज पर इस परिसर का सौंदर्यीकरण एवं समुचित विकास किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस विरासत से परिचित हो सकें। उनका कहना था कि ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट करने के बजाय उनके संरक्षण की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए।

इस पर नगर निगम आयुक्त ने जवाब देते हुए कहा कि संबंधित संरचना अत्यंत जर्जर अवस्था में है और किसी भी समय हादसे का कारण बन सकती है। यदि इसके कारण किसी नागरिक की जान-माल का नुकसान होता है तो उसकी जवाबदेही प्रशासन पर आएगी। इसलिए जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नियमानुसार इसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

चर्चा के दौरान मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने भी स्पष्ट किया कि इस मामले में नगर निगम को किसी पुरातत्व विभाग की निरीक्षण रिपोर्ट लेना आवश्यक नहीं है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और जर्जर संरचनाओं के संबंध में आवश्यक कार्रवाई नियमों के अनुसार की जाएगी।

सभा में पार्षद फारूक टुंडीवाले ने विकास कार्यों में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि संबंधित परिसर में पहले पुराना मूर्ति बेस हटाया जा चुका है और नए बेस के निर्माण के लिए वर्क ऑर्डर भी जारी हो चुका है, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इस देरी के लिए जिम्मेदार कौन है।

इस पर सीईओ ने संबंधित विभाग के इंजीनियर सैयद सऊद से स्पष्टीकरण मांगा। इंजीनियर ने बताया कि ठेकेदार को दो बार पत्र भेजकर तत्काल कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उसने अब तक काम प्रारंभ नहीं किया। इस पर सीईओ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि यदि ठेकेदार कार्य शुरू नहीं कर रहा है तो उसका वर्क ऑर्डर तत्काल निरस्त किया जाए तथा नया टेंडर जारी कर निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराया जाए, ताकि विकास कार्यों में और विलंब न हो।

वहीं, दरगाह वेश के मुद्दे पर कादराबाद दरगाह कमेटी और महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि दोनों संस्थाएं केवल पत्राचार तक सीमित दिखाई दे रही हैं, जबकि ऐतिहासिक वक्फ संपत्ति के संरक्षण, रखरखाव और उसके कानूनी संरक्षण के लिए अब तक कोई प्रभावी पहल सामने नहीं आई है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि संबंधित संरचना वास्तव में वक्फ संपत्ति का हिस्सा है, तो वक्फ अधिनियम के तहत उसके संरक्षण, रखरखाव और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जिम्मेदारी महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड, उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जालना जिला वक्फ अधिकारी तथा कादराबाद दरगाह कमेटी की भी बनती है। इसके बावजूद समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए जाने से ऐतिहासिक धरोहर के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

नगर निगम की सामान्य सभा में उठे इन दोनों मुद्दों ने एक ओर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विकास कार्यों में हो रही देरी पर सवाल खड़े किए, तो दूसरी ओर ऐतिहासिक वक्फ संपत्तियों के संरक्षण को लेकर संबंधित संस्थाओं की भूमिका पर भी बहस तेज कर दी। अब शहरवासियों की नजर इस बात पर है कि नगर निगम प्रशासन, महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड, जिला वक्फ अधिकारी और कादराबाद दरगाह कमेटी इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं तथा ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और लंबित विकास कार्यों को लेकर क्या ठोस निर्णय लिए जाते हैं।

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