आंदोलन की सफलता पर भावुक हुए अभिजीत दीपके के माता-पिता, बोले- “अब वह सिर्फ हमारा नहीं, पूरे देश का बेटा है”

औरंगाबाद | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के आंदोलन को सफलता मिलने के बाद उनके माता-पिता ने भावुक प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, “अब वह सिर्फ हमारा नहीं, बल्कि पूरे देश का हो गया है।” अमेरिका की तीन बड़ी नौकरी के प्रस्ताव ठुकराकर आंदोलन का रास्ता चुनने वाले अभिजीत के अनशन के दौरान हर पल चिंता में बीतने की बात उनकी मां अनीता दीपके और पिता भगवान दीपके ने साझा की। उन्होंने अभिजीत के बचपन, अमेरिका की नौकरी छोड़ने के फैसले और समाज सेवा के प्रति उनके समर्पण से जुड़ी कई यादें भी साझा कीं।
भगवान दीपके ने बताया कि बचपन से अभिजीत कभी भूखा नहीं रह पाता था। समय पर भोजन न मिलने पर वह बेचैन हो जाता था। ऐसे में कई दिनों तक उसे अनशन पर बैठे देख पूरा परिवार बेहद चिंतित था। उन्होंने कहा कि अभिजीत हमेशा से सरल स्वभाव का रहा है और गरीबों का दुख उससे देखा नहीं जाता। कोरोना महामारी के दौरान भी उसने जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने का काम किया था। दूसरों के लिए जीने की भावना उसमें बचपन से ही थी।
परिजनों के अनुसार, अभिजीत को अमेरिका की एक विज्ञापन कंपनी से अच्छी तनख्वाह वाली तीन नौकरी के प्रस्ताव मिले थे। हालांकि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के बाद कुछ लोगों ने उन्हें “अमेरिका में रहकर भारत की बात मत करो” कहकर आलोचना की। इस बात से आहत होकर उन्होंने सभी नौकरी के प्रस्ताव ठुकरा दिए और भारत लौटकर आंदोलन में पूरी तरह जुटने का फैसला किया।
भगवान दीपके ने बताया कि अभिजीत मात्र 13 वर्ष की उम्र में ही अन्ना हजारे के आंदोलन से काफी प्रभावित हो गए थे। आठवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान वह “मैं भी अन्ना हजारे” लिखी टोपी पहनकर अपने दोस्तों के साथ रैलियां निकालते थे। तभी से उन्होंने समाज और देश के लिए कुछ करने का संकल्प लिया था।
