पालकमंत्री संजय शिरसाट मानहानि प्रकरण: इम्तियाज जलील ने अदालत में पेश किया पक्ष, अगली सुनवाई 17 अगस्त को

औरंगाबाद | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
पालकमंत्री संजय शिरसाट पर लगाए गए आरोपों को लेकर दायर मानहानि मामले में पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके आरोप विधानसभा में उठाए गए मुद्दों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखे गए थे। इसमें किसी भी प्रकार की मानहानि या बदनामी करने का उद्देश्य नहीं था। यह स्पष्टीकरण उन्होंने दिवाणी न्यायाधीश एम. के. सय्यद की अदालत में दिया। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।
इम्तियाज जलील ने आरोप लगाया है कि पालकमंत्री संजय शिरसाट वतन की जमीन पर एक डिस्टिलरी उद्योग स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका दावा है कि संबंधित कंपनी में पालकमंत्री की पत्नी, पुत्र और एक डेवलपर को निदेशक के रूप में दर्शाया गया है। इन आरोपों के बाद पालकमंत्री शिरसाट ने इम्तियाज जलील के खिलाफ मानहानि का दावा दायर किया है।
सुनवाई के दौरान इम्तियाज जलील ने स्वयं अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि संबंधित 5 हजार वर्गफुट वतन भूमि पर लगभग 105 करोड़ रुपये की परियोजना प्रस्तावित है, जिससे केवल 93 लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया जा रहा है।
जलील ने अदालत को बताया कि इस वतन भूमि का मुद्दा विधानसभा में भी उठ चुका है तथा इसे सरकारी वतन भूमि बताते हुए भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (एसीबी) में भी शिकायत दर्ज कराई गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि पालकमंत्री की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता राजेश काले ने पहले उनका वकीलपत्र स्वीकार किया था, लेकिन बाद में एक संदेश भेजकर व्यक्तिगत कारणों से यह मामला नहीं लड़ पाने की जानकारी दी। जलील का दावा है कि अधिवक्ता काले, पालकमंत्री संजय शिरसाट के रिश्तेदार होने के कारण इस मामले से अलग हुए।
वहीं, अधिवक्ता राजेश काले ने अदालत में स्पष्ट किया कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से यह मामला नहीं लड़ने का निर्णय लिया था। उन्होंने यह भी बताया कि इम्तियाज जलील से प्राप्त फीस वापस कर दी गई है। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि पालकमंत्री शिरसाट से उनका पारिवारिक संबंध सर्वविदित है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित की है।
