मराठा क्रांति मोर्चा का बड़ा ऐलान, 9 अगस्त से आमरण अनशन; सरकार के सामने रखीं कई मांगें

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
मराठा क्रांति मोर्चा ने राज्य सरकार पर मराठा समाज को बार-बार केवल आश्वासन देकर गुमराह करने का आरोप लगाया है। विभिन्न लंबित मांगों को लेकर 9 अगस्त (रविवार) से औरंगाबाद के क्रांति चौक में आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा की गई है। गुरुवार (6 अगस्त) को आयोजित पत्रकार परिषद में मोर्चा के समन्वयकों ने कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि हैदराबाद गजेटियर के आधार पर मराठा समाज को आरक्षण कैसे दिया जाएगा। इसे आंदोलन की प्रमुख मांग बताया गया।
समन्वयक योगेश शेळके ने बताया कि मराठा समाज की लंबित मांगों पर निर्णय लेने के लिए जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि जिन मराठा समाज के लोगों के पास मराठा-कुणबी की नोंद नहीं है या जिनकी वंशावली मेल नहीं खाती, उन्हें हैदराबाद गजेटियर के आधार पर कुणबी जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र देने को लेकर सरकार अपनी स्पष्ट नीति घोषित करे।
मोर्चा ने यह भी मांग की कि ईडब्ल्यूएस आरक्षणधारकों को ओबीसी वर्ग की तरह शिक्षा, नौकरी, छात्रवृत्ति, छात्रावास, आर्थिक योजनाओं तथा अन्य सभी सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए।
ज्ञापन में मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मामलों को तत्काल वापस लेने, सारथी संस्था के लिए 50 हजार करोड़ रुपये का विशेष निधि मंजूर करने, विदेश शिक्षा योजना का विस्तार करने, कम से कम 400 शैक्षणिक संस्थाओं का चयन करने तथा पात्रता के लिए न्यूनतम अंकों की सीमा 75 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत करने की मांग की गई है। साथ ही महिला उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु सीमा की शर्त समाप्त करने की भी मांग रखी गई है।
इसके अलावा अण्णासाहेब पाटील आर्थिक पिछड़ा विकास महामंडल के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का निधि, व्यक्तिगत एवं सामूहिक ऋण सीमा बढ़ाने, लंबित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने तथा मराठा आरक्षण आंदोलन के शहीदों की स्मृति में कायगांव में ‘मराठा हुतात्मा स्तंभ’ का निर्माण करने की मांग भी की गई है।
समन्वयकों प्रो. माणिक शिंदे और प्रो. शिवानंद भानुसे ने कहा कि जब तक राज्य सरकार सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। पत्रकार परिषद में पंढरीनाथ गोडसे पाटील और सुनील कोटकर सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
