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औरंगाबाद में 4 फ्लाईओवर तोड़कर बनेगा 4 हजार करोड़ का अखंड फ्लाईओवर, 135 करोड़ का खर्च होगा बेकार

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा 

शेंद्रा से बजाजनगर (ओएसिस चौक) तक मराठवाड़ा का सबसे लंबा अखंड फ्लाईओवर बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिवस के कार्यक्रम में की थी। इस संबंध में पालकमंत्री संजय शिरसाट ने शनिवार को जानकारी देते हुए बताया कि यातायात जाम की समस्या दूर करने के लिए अखंड फ्लाईओवर जरूरी है। इसका डीपीआर तैयार हो चुका है और इस परियोजना के लिए करीब 4 हजार करोड़ रुपये का टेंडर अगले तीन महीनों में जारी किया जाएगा।

नया फ्लाईओवर बनाने के लिए जालना रोड पर करीब 135 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए चार मौजूदा फ्लाईओवरों को तोड़ना पड़ेगा। शिरसाट ने बताया कि इन फ्लाईओवरों को अगले 80 से 100 वर्षों की जरूरत को ध्यान में रखकर बनाया गया था, लेकिन अब महज 10 से 15 वर्षों के भीतर ही इन्हें तोड़ने की नौबत आ रही है।

जालना रोड पर यातायात जाम की समस्या दूर करने के लिए वर्ष 1985 से 2015 के बीच सिडको बस स्टैंड, मोंढा नाका, क्रांति चौक और महावीर चौक में चार फ्लाईओवर बनाए गए थे। इनकी लंबाई करीब 500 से 1,000 मीटर और चौड़ाई 12 से 15 मीटर थी। इन चारों फ्लाईओवरों के निर्माण पर तत्कालीन प्रशासन ने करीब 135 करोड़ रुपये खर्च किए थे।

पहले ही अखंड फ्लाईओवर का विचार करना चाहिए था

सेवानिवृत्त स्थापत्य विभाग प्रमुख प्रा. डॉ. राजाराम दमगीर ने कहा कि अखंड फ्लाईओवर जरूरी है। यदि मौजूदा चार फ्लाईओवरों का निर्माण करते समय ही अगले 100 वर्षों की जरूरत को ध्यान में रखा गया होता, तो शायद आज इन्हें तोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

उन्होंने कहा कि निर्माण क्षेत्र में लागत-लाभ अनुपात यानी बेनिफिट-कॉस्ट रेशियो को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए खर्च की तुलना में नागरिकों को कितना लाभ मिलेगा, यह महत्वपूर्ण होता है। अखंड फ्लाईओवर से जालना रोड के ऊपर की यातायात व्यवस्था सुचारू हो सकती है, लेकिन फ्लाईओवर के नीचे शहर के अंदरूनी रास्तों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है।

फ्लाईओवर तोड़ने से यातायात जाम का संकट

शहर में बनाए गए फ्लाईओवर आमतौर पर कम से कम 100 वर्षों की जरूरत को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। लेकिन महज 10 से 15 वर्षों में इन्हें अपर्याप्त मानकर तोड़ने की नौबत आने से प्रशासन की दूरदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। पुराने फ्लाईओवरों को तोड़ने और नए फ्लाईओवर के निर्माण पर दोबारा जनता का पैसा और समय खर्च होगा।

इसके अलावा पुराने फ्लाईओवरों को तोड़ने और नए अखंड फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान कई वर्षों तक पूरे शहर को यातायात जाम की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

क्रांति चौक में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को लेकर भी सवाल

क्रांति चौक में प्रस्तावित नए फ्लाईओवर को लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का मुद्दा भी महत्वपूर्ण होगा। वर्ष 2012 में बनाए गए पुराने फ्लाईओवर के कारण शिवाजी महाराज की प्रतिमा ढक रही थी। इस पर शिवप्रेमियों ने काफी नाराजगी जताई थी। इसके बाद हाल ही में करोड़ों रुपये खर्च कर प्रतिमा के चबूतरे की ऊंचाई बढ़ाई गई और भव्य प्रतिमा स्थापित की गई।

विशेष बात यह है कि प्रतिमा के दोनों ओर से फ्लाईओवर बनाया गया था। अब यदि पुराने फ्लाईओवर को तोड़कर उसकी जगह अधिक ऊंचा, चौड़ा और अखंड नया फ्लाईओवर बनाया जाता है, तो क्या शिवाजी महाराज की प्रतिमा फिर से नए फ्लाईओवर के नीचे चली जाएगी? डीपीआर तैयार करते समय इस संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दे पर भी विचार करना जरूरी होगा।

जालना रोड पर रोजाना करीब 3 लाख वाहनों की आवाजाही

शेंद्रा से वालूज तक का जालना रोड शहर की प्रमुख यातायात धुरी है। वर्तमान में इस मार्ग से रोजाना करीब 2.5 से 3 लाख वाहन गुजरते हैं। इनमें लगभग 60 प्रतिशत दोपहिया वाहन, 20 प्रतिशत कारें, 10 प्रतिशत रिक्शा और 10 प्रतिशत भारी वाहन शामिल हैं।

पीक आवर्स में हर घंटे हजारों वाहन इस मार्ग से आते-जाते हैं। पुराने फ्लाईओवरों को तोड़ने और 4 हजार करोड़ रुपये की लागत से अखंड फ्लाईओवर बनाने की पूरी प्रक्रिया में कम से कम 3 से 5 वर्ष लग सकते हैं।

इस दौरान जालना रोड की भारी यातायात व्यवस्था को वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ना पड़ेगा। इससे पहले से ही संकरे शहर के अंदरूनी रास्तों पर यातायात का भारी दबाव बढ़ सकता है। यातायात विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस दौरान शहर की यातायात व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

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