3 साल की बच्ची से हैवानियत करने वाला दरिंदा अब सलाखों में सड़ेगा उम्रभर, जालना अदालत का ऐतिहासिक फैसला

जालना | कादरी हुसैन
तीन वर्षीय बच्ची के साथ हुए जघन्य यौन अपराध के मामले में जालना की विशेष जिला एवं सत्र न्यायालय ने रिकॉर्ड समय में फैसला सुनाते हुए न्याय व्यवस्था की तत्परता की मिसाल पेश की है। घटना से लेकर सजा तक की पूरी प्रक्रिया मात्र 57 दिनों में पूरी हुई। विशेष न्यायाधीश कृपेश विजय मोरे ने आरोपी अजय संतोष विटोरे (21 वर्ष, निवासी गोंदेश्वर मंदिर के पास, कहारवाड़ा, गोंदी, तहसील अंबड, जिला जालना) को उसके शेष जीवन तक कारावास में रहने की सजा सुनाई है, साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को छह माह की अतिरिक्त सश्रम कारावास काटनी होगी।
अदालत ने पीड़िता के लिए राहत का प्रबंध करते हुए राज्य सरकार की ‘मनोधैर्य योजना’ के अंतर्गत 3 लाख रुपये की सहायता राशि और जुर्माने की पूरी रकम मुआवजे के तौर पर देने का निर्देश भी दिया।
कैसे हुई थी वारदात
10 जून 2026 की दोपहर करीब डेढ़ बजे यह घटना घटी। बच्ची अपने घर के नजदीक खेल रही थी, तभी आरोपी अपनी काली हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर वहां पहुंचा और उसे अकेला पाकर उठा ले गया। परिवार वालों ने जब बच्ची को न पाया तो तलाश शुरू की, और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में आरोपी को बच्ची के साथ बाइक पर जाते देखा गया।
आरोपी बच्ची को देउलगांव रोड स्थित वन विभाग के जंगली इलाके में ले गया, जहां उसने उसके साथ जघन्य कृत्य किया। बाद में जब वह बच्ची को लेकर बाइक पर घूम रहा था, बस स्टैंड के निकट पीड़िता के पिता की नजर उस पर पड़ गई और स्थानीय लोगों की मदद से उसे पकड़ लिया गया। घायल अवस्था में मिली बच्ची को तुरंत सरकारी महिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने यौन उत्पीड़न की पुष्टि की।
तेज जांच, तेज सुनवाई
मामले की नजाकत भांपते हुए जालना के पुलिस अधीक्षक तेघबीर सिंह संधू ने तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) खड़ा किया, जिसमें अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम साली, उपविभागीय अधिकारी अनंत कुलकर्णी, पुलिस निरीक्षक संदीप भारती समेत पिंक दस्ते के जवान शामिल रहे।
टीम ने महज 20 दिनों के भीतर 2 जुलाई 2026 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। इसके बाद विशेष सरकारी अभियोजक वर्षा लक्ष्मीकांत मुकीम की अगुवाई में 17 से 31 जुलाई के बीच, छुट्टियों को छोड़कर सिर्फ 11 कार्यदिवसों में 25 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक रिपोर्ट, डॉक्टर शिरीन शेख और डॉ. यू.ए. पठान की मेडिकल गवाही तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इस मामले में निर्णायक साबित हुए।
किन धाराओं में मिली सजा
अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 65(2), 74 और 140(4) के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 4, 6, 8 और 12 के तहत दोषी करार दिया।
अभियोजक वर्षा मुकीम ने इस फैसले को न्यायिक तंत्र की फुर्ती का शानदार नमूना बताते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया महज 57 दिनों और अदालती सुनवाई सिर्फ 25 दिनों में पूरी होने से पीड़ित परिवार को बिना विलंब न्याय मिल सका।