निर्माण श्रमिक विभाग के उपायुक्त अमोल जाधव गिरफ्तार; करोड़ों के साहित्य घोटाले में बड़ा ट्विस्ट!
लाभार्थियों को बांटे जाने वाले घरेलू उपयोग के साहित्य को कथित रूप से बेचने का आरोप; शिकायतकर्ता अधिकारी ही निकले आरोपी

जालना | कादरी हुसैन
निर्माण श्रमिकों के लिए शासन की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले घरेलू उपयोग के साहित्य के किट में कथित करोड़ों रुपये के गबन एवं अनियमितता के मामले में परतूर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में निर्माण श्रमिक विभाग के उपायुक्त अमोल जाधव को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। खास बात यह है कि इस कथित अनियमितता की शिकायत पुलिस में दर्ज कराने वाले जाधव ही जांच के दौरान आरोपी पाए गए, जिससे मामले में नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है।

जालना जिला निर्माण श्रमिक अधिकारी के रूप में कार्यरत रहने के दौरान अमोल जाधव ने निर्माण श्रमिकों को वितरित किए जाने वाले घरेलू उपयोग के साहित्य के किट में कथित तौर पर अनियमितता की, ऐसा आरोप है। पुलिस जांच में करीब 100 ट्रक साहित्य के किट लाभार्थियों को वितरित करने के बजाय निजी व्यक्तियों को बेच दिए जाने का आरोप सामने आया है।
इस मामले में कथित अनियमितता की जानकारी सामने आने के बाद कुछ दिन पहले अमोल जाधव ने स्वयं परतूर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान साहित्य के लेन-देन सहित अन्य पहलुओं की जांच की गई। इसी दौरान जाधव की भूमिका भी पुलिस की जांच के दायरे में आ गई।
इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अमोल जाधव को गिरफ्तार कर लिया। जिस अधिकारी ने स्वयं कथित अनियमितता की शिकायत दर्ज कराई थी, वही जांच के दौरान आरोपी बनने से निर्माण श्रमिक विभाग और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
1 करोड़ 79 लाख रुपये का मुद्देमाल जब्त
इस मामले में पुलिस ने अब तक करीब 1 करोड़ 79 लाख रुपये का मुद्देमाल जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। साहित्य आखिर किन लोगों को बेचा गया, इस लेन-देन में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कथित अनियमितता का कुल दायरा कितना है, इसकी जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।
क्या और बड़े नाम सामने आएंगे?
इस मामले में आने वाले दिनों में और कौन-कौन से बड़े नाम सामने आते हैं? कथित अनियमितता की वास्तविक राशि कितनी है? साहित्य की बिक्री में और किन लोगों की भूमिका थी? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद सामने आने की संभावना है। फिलहाल इस मामले को लेकर निर्माण श्रमिक विभाग और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर जारी है।