औरंगाबाद में दो बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में, ढाबे पर कुक और वेटर के रूप में कर रहे थे काम

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
भारत में अवैध रूप से प्रवेश कर औरंगाबाद तालुका के मांडकी क्षेत्र में रह रहे दो बांग्लादेशी नागरिकों को स्थानीय अपराध शाखा (LCB) और चिकलठाणा पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में हिरासत में लिया है। जांच में सामने आया है कि दोनों मांडकी शिवार स्थित इमानदार ढाबे पर कुक और वेटर के रूप में काम कर रहे थे। उनके पास से बांग्लादेश सरकार के राष्ट्रीय पहचान पत्र और जन्म प्रमाण पत्र भी बरामद हुए हैं।
जिले में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस विशेष अभियान चला रही है। इसी अभियान के तहत 11 अगस्त को स्थानीय अपराध शाखा की टीम को सूचना मिली थी कि चिकलठाणा पुलिस थाना क्षेत्र के मांडकी इलाके में कुछ विदेशी नागरिक संदिग्ध परिस्थितियों में रह रहे हैं।
सूचना की पुष्टि के बाद स्थानीय अपराध शाखा और चिकलठाणा पुलिस की संयुक्त टीम ने इमानदार ढाबे पर छापेमारी कर दो संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने खुद को भारतीय नागरिक बताया, लेकिन बातचीत और दस्तावेजों की जांच के दौरान संदेह गहराने पर विस्तृत पूछताछ की गई। बाद में दोनों ने बांग्लादेशी नागरिक होने की बात स्वीकार कर ली।
मोबाइल फोन और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के दौरान बांग्लादेश सरकार द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र और बांग्लादेश में रह रहे परिजनों से संपर्क के प्रमाण मिले। पुलिस के अनुसार, इन दस्तावेजों से उनका बांग्लादेशी नागरिक होना स्पष्ट हो गया।
हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान मोहम्मद बिलाल मोहम्मद मुकलिसउद्दीन रेहमान (27) निवासी काजीपेठ, पोलियानापुर, थाना महेशपुर, जिला झिनायदा, बांग्लादेश तथा मोहम्मद रासेल मोहम्मद इरशाद अली (19) निवासी पोलियानापुर, मजीरपाड़ा, थाना महेशपुर, जिला झिनायदा, बांग्लादेश के रूप में हुई है। दोनों वर्तमान में मांडकी शिवार, पलशी क्षेत्र में रह रहे थे।
पुलिस जांच में मोहम्मद बिलाल ने बताया कि वह वर्ष 2017-18 के दौरान एक दलाल की मदद से भारत-बांग्लादेश सीमा अवैध रूप से पार कर भारत आया था। इसके बाद उसने कोलकाता, मुंबई और औरंगाबाद में विभिन्न स्थानों पर काम किया। कोविड काल में वह अपने मूल गांव बांग्लादेश लौट गया था और बाद में दोबारा भारत आ गया।
वहीं मोहम्मद रासेल ने भी करीब पांच वर्ष पहले अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने की बात स्वीकार की। जांच में सामने आया कि वह कोलकाता, मनमाड और औरंगाबाद क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर काम करता रहा है।
पुलिस के अनुसार दोनों के पास भारत में प्रवेश के लिए आवश्यक वैध पासपोर्ट, वीजा या अन्य यात्रा दस्तावेज नहीं मिले हैं। साथ ही, बांग्लादेशी नागरिकता छिपाकर भारतीय नागरिक होने का दावा करने के पहलू की भी जांच की जा रही है।
पुलिस दोनों के भारत में रहने की अवधि, निवास स्थान, रोजगार और स्थानीय संपर्कों की विस्तृत जांच कर रही है। नागरिकता की आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है। उपलब्ध दस्तावेजों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर Immigration and Foreigners Act, 2025 की संबंधित धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है। सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत कर दोनों को बांग्लादेश भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
औरंगाबाद ग्रामीण पुलिस ने होटल, ढाबा संचालकों और मकान मालिकों से अपील की है कि बाहरी व्यक्तियों को रोजगार या रहने की जगह देने से पहले उनकी पहचान और आवश्यक दस्तावेजों की पूरी जांच अवश्य करें। किसी भी संदिग्ध नागरिकता या अवैध रूप से रहने की जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक प्रकाश जाधव और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत स्वामी के मार्गदर्शन में स्थानीय अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक विजयसिंह राजपूत, पुलिस उपनिरीक्षक लहु घोडे तथा उनकी टीम और चिकलठाणा पुलिस थाना के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से की गई।