खवड्या डोंगर सामूहिक मृत्यु प्रकरण में नया मोड़, पारिवारिक विवाद और प्रेम विवाह के विरोध की चर्चा

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
खवड्या डोंगर पर चांदगुडे परिवार के तीन सदस्यों की सामूहिक मृत्यु की घटना को लेकर रोज नए खुलासे और आरोप-प्रत्यारोप सामने आ रहे हैं। शुरुआती तौर पर बेटे के आईफोन की जिद को घटना की वजह बताया जा रहा था, लेकिन अब करीब 20 साल पुराने पारिवारिक विवाद, प्रेम विवाह के विरोध और ससुराल-मायके पक्ष के बीच चले आ रहे मतभेदों की बात सामने आ रही है। हालांकि, घटना का वास्तविक कारण क्या था, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मौत से छह दिन पहले संगीता चांदगुडे द्वारा अपने यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया गया एक वीडियो अब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उन्होंने अपने पति मुरलीधर और ननदों पर गंभीर आरोप लगाए थे। दूसरी ओर, मुरलीधर की बहन शोभा म्हस्के और उनके परिवार ने संगीता के आरोपों को खारिज किया है। वहीं, संगीता की बहन पल्लवी पाटील ने पलटवार करते हुए अपनी बहन के ससुराल पक्ष पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
मौत से छह दिन पहले संगीता ने क्या कहा था?
16 अगस्त को पोस्ट किए गए वीडियो में संगीता चांदगुडे ने आरोप लगाया था कि आजकल की बहनें अपनी भाभी को समझने के बजाय भाई का घर कैसे टूटे, इस पर ध्यान देती हैं। उन्होंने कहा था कि जब उनका पहला बेटा इस दुनिया से चला गया था, तब भी उन्हें कथित तौर पर गालियां दी गईं और संपत्ति अपने नाम कर ली गई।
संगीता ने वीडियो में अपने पति मुरलीधर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा था कि 15 साल तक पत्नी को जो तकलीफ हुई, उसका उन्हें कभी दुख नहीं हुआ। जो बेटा चला गया, उसके लिए भी उन्हें दुख नहीं हुआ और जो बेटा कुणाल उनके साथ था, उसके लिए भी नहीं। लेकिन अपनी बहनों के मामले में उन्हें इतना दुख क्यों हो रहा है?
उन्होंने यह भी कहा था कि यदि ननदों से इतनी गलतियां होने के बावजूद पति उन्हें सही मानते हैं और उनके द्वारा केवल सच बताए जाने पर उन्हें गलत ठहराया जाता है, तो यह उनके लिए अन्याय है।
संगीता के अनुसार, ननदों के परिवार में दुखद घटना होने के बाद पति और रिश्तेदारों को उम्मीद थी कि वह पुराने विवाद भूलकर उनका साथ देंगी। लेकिन उन्होंने इसका विरोध किया था। वीडियो के अंत में उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि जब अब तक उन्हें कभी साथ नहीं दिया गया, तो उनसे भी किसी तरह की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।
मुरलीधर की बहन का आरोप—‘संगीता ने ही भाई को घर से निकाल दिया था’
संगीता के वीडियो के बाद मुरलीधर चांदगुडे के मूल गांव धनगर पिंपलगांव, जिला जालना में उनके परिवार ने भी सामने आकर अपनी बात रखी।
मुरलीधर की बहन शोभा म्हस्के ने आरोप लगाया कि घर में लगातार विवाद होने के कारण कुछ दिन पहले संगीता और उनके बेटे कुणाल ने ही मुरलीधर को घर से बाहर कर दिया था। उनका कहना था कि जब भी मुरलीधर उनसे बात करते थे, तब संगीता उनसे विवाद करती थीं। मुरलीधर गांव आते थे, लेकिन घर जाने के बजाय सीधे खेत की ओर चले जाते थे।
शोभा म्हस्के के मुताबिक, मुरलीधर और संगीता का करीब 20 वर्ष पहले प्रेम विवाह हुआ था। परिवार की ओर से उस समय इस विवाह का विरोध किया गया था। मुरलीधर के पिता ने उन्हें कथित तौर पर समझाया था कि संगीता शहर की लड़की हैं और उनका परिवार गांव से है, इसलिए यह विवाह नहीं करना चाहिए। लेकिन मुरलीधर ने परिवार की बात नहीं मानी।
शोभा के अनुसार, इसी वजह से दोनों परिवारों के बीच वर्षों तक बातचीत बंद रही। बहनों ने मुरलीधर से कहा था कि उन्हें माता-पिता की चिंता न करें और केवल बातचीत बनाए रखें, लेकिन बाद में मुरलीधर का परिवार से संवाद भी टूट गया।
संगीता की बहन का पलटवार—‘मुरलीधर के सिर में फावड़ा किसने मारा था?’
संगीता चांदगुडे की बहन पल्लवी पाटील ने मुरलीधर के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उनकी बहन और उसका बेटा दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके ससुराल पक्ष की ओर से उनकी बहन पर आरोप लगाए जा रहे हैं।
पल्लवी पाटील ने सवाल उठाया कि यदि यह कहा जा रहा है कि उनकी बहन ने मुरलीधर को अपने नियंत्रण में रखा और 20 वर्षों तक उन्हें परिवार से दूर रखा, तो फिर मुरलीधर को गांव और खेत छोड़ने के लिए मजबूर करने वाली परिस्थितियां क्या थीं? उन्होंने सवाल किया कि मुरलीधर के सिर में फावड़ा किसने और क्यों मारा था?
हालांकि, पल्लवी पाटील ने यह भी कहा कि इस समय आरोप-प्रत्यारोप का दौर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका परिवार इस समय गहरे सदमे में है और उन्हें अपनी बहन के दुख से उबरने का समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार के संभलने के बाद वह उचित समय पर सभी सवालों के जवाब देंगी।
अंतिम संस्कार अलग-अलग, लेकिन अस्थि विसर्जन एक साथ
खवड्या डोंगर की घटना के बाद घाटी अस्पताल में भी दोनों पक्षों के रिश्तेदारों के बीच विवाद की स्थिति बनी थी। संगीता के रिश्तेदारों ने कथित तौर पर तीनों शव एक साथ मुरलीधर के परिवार को सौंपने का विरोध किया था। शव मिलने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए मुरलीधर के रिश्तेदारों ने उस समय शांत रहना उचित समझा।
इसके बाद मुरलीधर का अंतिम संस्कार उनके गांव में, जबकि संगीता और कुणाल का अंतिम संस्कार मुकुंदवाड़ी में किया गया।
हालांकि, रविवार सुबह संगीता और कुणाल की अस्थियां लेकर उनके रिश्तेदार पैठण पहुंचे। इसी दौरान मुरलीधर के माता-पिता और बहनें भी उनकी अस्थियां लेकर पैठण पहुंचीं। इसके बाद गोदावरी नदी में तीनों की अस्थियों का एक साथ विसर्जन किया गया।
घटना का वास्तविक कारण सामने लाना पुलिस के लिए चुनौती
चांदगुडे परिवार में वास्तव में क्या चल रहा था? कुणाल के मन में इतना बड़ा कदम उठाने का विचार क्यों आया? परिवार के भीतर किस तरह का तनाव था? इन सवालों के जवाब तलाशना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, परिवार के तीनों सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए परिवार के भीतर चल रहे विवाद और घटना के वास्तविक कारण के संबंध में निश्चित निष्कर्ष निकालना फिलहाल कठिन है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
प्राणीमित्र ने ‘शेरू’ को अपनाया
चांदगुडे परिवार के घर में रहने वाले ‘शेरू’ नाम के कुत्ते को एक प्राणीमित्र ने अपने संरक्षण में ले लिया है। बताया जाता है कि चांदगुडे परिवार शेरू से बेहद लगाव रखता था। संगीता द्वारा शेरू को खाना खिलाते हुए कई वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए थे। परिवार के तीनों सदस्यों की मौत के बाद शेरू अकेला पड़ गया था, जिसके बाद एक प्राणीमित्र ने उसकी जिम्मेदारी उठाई।
