ओवैसी को BJP की B-टीम बता रही RJD, मुस्लिम वोटों पर फिर सियासी जंग तेज

ओवैसी का मिशन बिहार: मुस्लिम राजनीति से राष्ट्रवाद की ओर, RJD को दिखी सियासी चुनौती
कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद असदुद्दीन ओवैसी की राजनीतिक शैली में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अब तक मुस्लिम मुद्दों की राजनीति करने वाले AIMIM प्रमुख एक राष्ट्रवादी नेता की छवि गढ़ने में जुटे हैं। यही नहीं, उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति में भी बड़ा बदलाव किया है। मुस्लिम बहुल सीमांचल के अलावा अब उनकी नजर उन सीटों पर है, जहां हिंदू वोटर निर्णायक भूमिका में हैं।
AIMIM ने इस बार बिहार में 50 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बनाई है, और 25 सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी शुरू कर दी है, जिनमें बहादुरगंज से कांग्रेस के पूर्व विधायक तौसीफ आलम और पूर्वी चंपारण के ढाका से राणा रणजीत सिंह के नाम शामिल हैं।
AIMIM की यह सक्रियता महागठबंधन, खासकर आरजेडी के लिए चिंता का विषय बन गई है। 2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM सीमांचल की पांच सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है, जिनमें से चार विधायक बाद में आरजेडी में शामिल हो गए थे। अब ओवैसी का 50 सीटों पर उतरने का फैसला सीधे तौर पर आरजेडी के मुस्लिम वोटबैंक में सेंध की रणनीति माना जा रहा है।
आरजेडी ने AIMIM को भाजपा की ‘बी-टीम’ करार देते हुए मुस्लिम समुदाय को सतर्क करने का प्रयास शुरू कर दिया है। पार्टी ने ओवैसी के पुराने करीबी और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहम्मद अली अशरफ फातमी को मैदान में उतार दिया है। फातमी ने ओवैसी पर भाजपा को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया और कहा कि ओवैसी की राजनीति से केवल भाजपा को मजबूती मिलती है।
वहीं, ओवैसी ने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान की आलोचना कर और भारतीय सेना के समर्थन में बयान देकर राष्ट्रवादी रुख अपनाया है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का समर्थन करते हुए भारत की सैन्य कार्रवाई को सही ठहराया और पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने की बात कही।
जानकारों का मानना है कि ओवैसी को अब इस बात का अंदाजा हो गया है कि केवल मुस्लिम वोटों के सहारे राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल नहीं किया जा सकता। इसलिए उन्होंने हिंदू उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारना शुरू किया है और खुद को एक राष्ट्रहित में सोचने वाले नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
बिहार में AIMIM की बढ़ती सक्रियता ने जहां महागठबंधन में हलचल मचा दी है, वहीं ओवैसी की राजनीति अब मुस्लिम हित से राष्ट्रवाद तक के दायरे में फैलती दिख रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आरजेडी की ओर से उठाए गए कदम ओवैसी के इस नए सियासी खेल को कितना प्रभावित कर पाते हैं।
