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वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण को मिली गति — ‘उम्मीद पोर्टल’ पर रजिस्ट्रेशन मुहिम में तेजी, फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स ने वक्फ बोर्ड अध्यक्ष समीर काज़ी से की चर्चा

जालना/कादरी हुसैन

राज्यभर में वक्फ संपत्तियों के डिजिटल पंजीकरण अभियान को अब नई रफ्तार मिल रही है। नए वक्फ कानून के तहत 5 दिसंबर 2025 तक सभी वक्फ संस्थाओं — मस्जिदों, मदरसों, ईदगाहों, कब्रिस्तानों और अन्य धार्मिक संपत्तियों — का “उम्मीद पोर्टल” पर पुनः पंजीकरण करना अनिवार्य है।

नए प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई संस्था या व्यक्ति जानबूझकर पंजीकरण नहीं कराता है, तो उस पर ₹20,000 से ₹1 लाख तक का जुर्माना या जेल की सज़ा भी हो सकती है। देर से पंजीकरण करने पर वक्फ संपत्तियों के अधिकारिक दावों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

इस पृष्ठभूमि में, फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स, जिला जालना की ओर से वक्फ संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सुविधा के लिए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद कार्यालय, दुखी नगर, गली नं. 1, जालना में विशेष पंजीकरण केंद्र स्थापित किया गया है।
यह केंद्र विशेषज्ञ तकनीशियनों की मदद से सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक तथा शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक वक्फ संस्थाओं का ऑनलाइन पंजीकरण कार्य कर रहा है।

सभी मस्जिदों, मदरसों, ईदगाहों और कब्रिस्तानों के ट्रस्टी एवं जिम्मेदार सदस्यों से अपील की गई है कि वे अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ शीघ्र केंद्र पर पहुंचकर अपनी संस्था का पंजीकरण पूर्ण करें, ताकि भविष्य में किसी कानूनी या प्रशासनिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।

इसी संदर्भ में आज फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स, जिला जालना के प्रतिनिधिमंडल ने वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जनाब समीर काज़ी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने “उम्मीद पोर्टल” पर सामने आ रही तकनीकी अड़चनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

अध्यक्ष जनाब समीर काज़ी साहब ने प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि सभी तकनीकी समस्याओं को जल्द से जल्द दूर किया जाएगा, ताकि राज्य की सभी वक्फ संस्थाएं बिना किसी बाधा के अपने पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर सकें।

प्रतिनिधिमंडल में खान इकबाल पाशा साहब, शेख अब्दुल मुजीब साहब, मौलाना फहीम फलाही साहब, अय्यूब खान साहब, अहमद नूर कुरैशी साहब और अता मोहम्मद बख्शी साहब शामिल थे।
वहीं अन्य उपस्थित सदस्यों में इकबाल कुरैशी साहब, अमजद फारूकी साहब, शेख वसीम साहब, अब्दुल हमीद साहब और अब्रार खान साहब का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में वक्फ संपत्तियों के डिजिटल रिकॉर्ड को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और कानूनी रूप से सशक्त बनाया जा सकेगा।

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