मुंबई की तबाही के लिए शिंदे जिम्मेदार! आदित्य ठाकरे का आरोप, कहा – ‘भ्रष्टनाथ शिंदे’ दें जनता को मुआवजा
समय से पहले बरसे मानसून के बादल, मुंबई जलमग्न — आदित्य ठाकरे ने शिंदे सरकार और BMC पर साधा निशाना

मुंबई में इस वर्ष मानसून ने मई महीने में ही दस्तक दे दी, जो कि दशकों में पहली बार हुआ है। सोमवार को मानसून की पहली ही बारिश ने मुंबई की हालत खराब कर दी। भारी बारिश के चलते अंधेरी, साकीनाका, दादर और दक्षिण मुंबई के अन्य इलाकों में जलभराव हो गया, जिससे सड़कें नदी जैसी बहने लगीं। लोकल ट्रेन, बस और मेट्रो सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस आपदा के लिए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार, BMC प्रशासन और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सीधे जिम्मेदार ठहराया। दादर स्थित शिवसेना भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आदित्य ठाकरे ने सरकार से मांग की कि जिन नागरिकों के घर और दुकानों में पानी भर गया, उन्हें सरकार की तिजोरी से मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि पहले ही BMC का खजाना लूटा जा चुका है, और अब जनता को राहत की ज़रूरत है।
बीएमसी की मानसून तैयारियों पर उठे सवाल
आदित्य ठाकरे ने कहा कि परेल, हिंदमाता और अन्य इलाके जो पिछले वर्षों में जलभराव से मुक्त थे, इस बार वहां भी पानी भर गया, जो साफ दिखाता है कि नालों की सफाई और सड़क निर्माण का कार्य ठीक से नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुंबई मनपा ने समय से पहले मानसून की जानकारी होने के बावजूद ठोस तैयारी नहीं की और केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया।
“भ्रष्टनाथ” शिंदे पर आदित्य का हमला
ब्रीच कैंडी में नई बनी सड़क के धंसने की घटना को लेकर आदित्य ने पूछा कि आखिर नई सड़क एक बारिश में कैसे धंस गई? उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ‘भ्रष्टनाथ शिंदे’ कहते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने मुंबई को डुबो दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब मंत्रालय में भी पानी भर गया और बीएमसी की असली तैयारी की पोल खुल गई।
राजनीतिक हमला और राहत की मांग
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने बीजेपी और शिंदे की शिवसेना पर बीएमसी का खजाना लूटने का आरोप लगाया और कहा कि भ्रष्टाचार की बारिश ने मुंबई को डुबा दिया। उन्होंने मांग की कि सभी प्रभावित नागरिकों को तत्काल मुआवजा मिले और जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई हो।
मुंबई की यह जलप्रलय और उससे जुड़ा राजनीतिक घमासान राज्य में मानसून के आगमन के साथ ही एक नया तूफान खड़ा कर रहा है — यह सिर्फ मौसम का नहीं, बल्कि शासन की जवाबदेही का भी इम्तिहान बन गया है।
