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फिलिस्तीनी हालात परखने पहुंचे राजदूतों पर चली इजरायली गोलियां, जांच की मांग तेज

जेनिन (वेस्ट बैंक) – इजरायल के वेस्ट बैंक स्थित जेनिन शरणार्थी शिविर में मंगलवार को उस वक्त तनाव भड़क उठा जब विदेशी राजनयिकों के एक प्रतिनिधिमंडल पर इजरायली सैनिकों ने चेतावनी स्वरूप गोलीबारी की। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में आक्रोश फैल गया है और कई देशों ने इजरायल से तत्काल जवाबदेही की मांग की है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह प्रतिनिधिमंडल 30 देशों के राजनयिकों का था, जो जेनिन शिविर में मानवीय हालात का जायजा लेने आया था। प्रतिनिधिमंडल में ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, चीन, मिस्र, जॉर्डन, तुर्किये और रूस सहित प्रमुख देशों के अधिकारी शामिल थे। जब यह प्रतिनिधिमंडल इलाके के संवेदनशील हिस्से में पहुंचा, तब इजरायली सैनिकों ने हवा में गोलियां चलाकर उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे हड़कंप मच गया और राजनयिक भयभीत होकर सुरक्षित स्थान की ओर भागे।

इजरायली सेना का बचाव

घटना पर सफाई देते हुए इजरायली सेना ने दावा किया कि प्रतिनिधिमंडल पूर्व निर्धारित मार्ग से हटकर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर गया था। सेना ने यह भी कहा कि गोलीबारी केवल चेतावनी के रूप में की गई और किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। सेना ने इस “असुविधा” के लिए खेद भी व्यक्त किया है।

दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने इस घटना को “अस्वीकार्य” बताया और कहा कि राजनयिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी मेजबान देश की होती है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

फ्रांस, इटली, स्पेन, पुर्तगाल और तुर्किये ने इजरायली राजदूतों को तलब कर घटना पर स्पष्टीकरण मांगा है। मिस्र और जॉर्डन ने इसे गंभीर कूटनीतिक उल्लंघन करार दिया है।

फिलिस्तीनी पक्ष का बयान

फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय के राजनीतिक सलाहकार अहमद अल-दीक, जो स्वयं प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद थे, ने कहा कि यह घटना इजरायली सेना की “लापरवाही और दमनकारी रवैये” को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इस हमले ने दुनिया के राजनयिकों को फिलिस्तीनी जनता की पीड़ा का प्रत्यक्ष अनुभव करा दिया।

घटना को लेकर क्षेत्र में तनाव और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है। फिलहाल सभी की निगाहें इजरायल सरकार की आगामी प्रतिक्रिया और संभावित जांच पर टिकी हैं।

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