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हावेरी गैंगरेप केस: जमानत पर छूटे आरोपियों ने निकाला विजय जुलूस, कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

कर्नाटक के हावेरी में बहुचर्चित गैंगरेप मामले में जमानत पर रिहा हुए आरोपियों के फूल-मालाओं से स्वागत और जुलूस ने कानून और समाज को शर्मसार कर दिया है। जैसे ही सातों मुख्य आरोपी जेल से बाहर आए, उन्हें अक्की अलूर कस्बे तक कारों के काफिले के साथ नगर भ्रमण कराया गया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

हावेरी की सब-जेल से रिहाई के बाद अफताब चंदनाकट्टी, मदर साब मंडक्की, सामिवुल्ला लालनावर, मोहम्मद सादिक, शोएब मुल्ला, तौसीफ चोटी और रियाज सविकेरी – इन सभी पर लगे गंभीर आरोपों के बावजूद नगर के मुख्य मार्गों पर खुलेआम ‘विजयी जुलूस’ निकाला गया। इस काफिले में पांच वाहन और बीस से अधिक समर्थक शामिल थे।

कोर्ट ने पीड़िता की पहचान में असमर्थता के चलते दी ज़मानत
हावेरी सेशंस कोर्ट ने आरोपियों को जमानत तब दी जब पीड़िता अदालत में उनकी स्पष्ट पहचान नहीं कर सकी। लेकिन जमानत के तुरंत बाद इस तरह का सार्वजनिक प्रदर्शन, न सिर्फ न्याय प्रक्रिया की गंभीरता पर सवाल उठाता है, बल्कि पीड़िता की सुरक्षा और सामाजिक संवेदना को भी गहरा आघात पहुंचाता है।

जनवरी 2024 की है घटना
यह मामला जनवरी 2024 का है, जब पीड़िता ने आरोप लगाया था कि वह अपने साथी के साथ होटल में थी, तभी कुछ लोगों ने हमला कर गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों ने उसे जबरन होटल से उठाया, दुर्व्यवहार किया और फिर एक लॉज के पास फेंक दिया।

जांच में सामने आए पुराने आपराधिक रिकॉर्ड
जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से कुछ आरोपी पहले से ही हिंसक घटनाओं और नैतिक पहरेदारी से जुड़े मामलों में लिप्त रहे हैं। हाल ही में एक नया वीडियो भी सामने आया है जिसमें पीड़िता के अपहरण और हमले के दृश्य हैं। पुलिस इस वीडियो की जांच कर रही है और संभव है कि स्वतः संज्ञान लेकर आगे की कार्रवाई की जाए।

यह मामला ना सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाता है बल्कि समाज में अपराधियों के प्रति बदलती मानसिकता और संवेदनशील मामलों के प्रति लापरवाही को भी उजागर करता है।

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