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‘साहब, घर-घर जाकर कचरा उठाने की अनुमति दीजिए’ – कन्नड शहर में कचरा समस्या को लेकर शिवसेना कार्यकर्ताओं का अनोखा निवेदन

प्रतिनिधि: अशरफ़ अली

औरंगाबाद जिले के कन्नड शहर में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। कन्नड नगरपरिषद की सीमा में पिछले दो महीनों से गलियों में घूमकर कचरा इकट्ठा करने वाली घंटा गाड़ी बंद है, जिससे स्थानीय नागरिक बेहद परेशान हैं। सड़कों पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं, जिससे बदबू और गंदगी का माहौल बन गया है। महिलाओं को यह समझ नहीं आ रहा कि घर का कचरा फेंकें तो कहां फेंकें।

इस समस्या को लेकर शिवसेना के कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिकों ने नगरपरिषद के मुख्याधिकारी को एक लिखित निवेदन सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि यदि नगरपरिषद कचरा नहीं उठा सकती, तो उन्हें अपने ट्रैक्टर से कचरा उठाने की लिखित अनुमति दी जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कन्नड शहर की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है। गटर और नालियां पूरी तरह जाम हैं, सड़क किनारे गंदगी का साम्राज्य फैला है और घंटा गाड़ी बंद है। यह शहर अब गंदगी की पहचान बन चुका है। नागरिकों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगरपरिषद को निवेदन दिया, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।

हर दिन नागरिक नगरपरिषद कार्यालय में यही शिकायतें लेकर पहुंचते हैं – “नलों में पानी नहीं आ रहा, गटर जाम है, सफाई नहीं हो रही, और घंटा गाड़ी बंद है।” जहां जिले के अन्य नगरपालिका क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था सुधरी है, वहीं कन्नड अभी भी गंदे पानी, कचरे और बंद स्ट्रीट लाइटों से जूझ रहा है।

स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि हर पांच साल में चुनाव आते हैं और नेता गटर, नालियां, गंदा पानी और कचरे जैसे मुद्दों पर ही वोट मांगते हैं। लेकिन इसके अलावा जनता की कोई समस्या उन्हें दिखाई नहीं देती।

इस निवेदन पर पूर्व उपनगराध्यक्ष डॉ. सदाशिव पाटील, पूर्व नगरसेवक संतोष पवार, सचिन काळे, विकास बागुल, सलमान शेख, प्रकाश काचोळे, प्रदीप बोडके, लक्ष्मीकांत सुरे, उदय सोनवणे और संगीता सावंत के हस्ताक्षर हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार गंदगी और उपेक्षा करने वाले जनप्रतिनिधियों को जनता सबक सिखाए बिना नहीं छोड़ेगी।

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