कुरैशी समाज के ऐतिहासिक फैसले का किसान संगठन ने किया स्वागत, कहा – हम साथ खड़े हैं

महाराष्ट्र में कुरैशी समाज द्वारा व्यापार और जानवरों की ख़रीद-फ़रोख़्त को स्वेच्छा से बंद करने के ऐतिहासिक निर्णय का व्यापक स्वागत हो रहा है। इस फैसले को सामाजिक सौहार्द और किसान-हित में एक बड़ा कदम मानते हुए भारतीय किसान मजदूर (संयुक्त मोर्चा) ने इसे सराहनीय बताते हुए कुरैशी समाज के साथ एकजुटता जताई है।
किसानों और कुरैशी समाज के बीच एकता का संदेश
मराठवाड़ा क्षेत्र के भारतीय किसान मजदूर (संयुक्त मोर्चा) के अध्यक्ष शेख मुख्तार अहमद शेख रहीम ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“हम तहेदिल से इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हैं। हमारी संघटना भविष्य में भी किसान और कुरैशी समाज के हितों और आंदोलनों में कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ी रहेगी।”
उन्होंने इसे समाज में सौहार्द, एकता और पारस्परिक समझ का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक समरसता और आपसी सहयोग को मजबूती देगा।
फैसले का व्यापक प्रभाव
कुरैशी समाज द्वारा व्यापार और जानवरों की ख़रीद-फ़रोख़्त रोकने का यह निर्णय न केवल सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पशु व्यापार की पारदर्शिता और नैतिकता को लेकर भी एक नई सोच की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इससे किसानों और समाज के अन्य वर्गों के बीच विश्वास का वातावरण बनेगा।
संयुक्त मोर्चा का समर्थन जारी रहेगा
भारतीय किसान मजदूर (संयुक्त मोर्चा) ने साफ किया कि वह भविष्य में भी कुरैशी समाज के किसी भी न्यायपूर्ण आंदोलन, मांग या सहयोगात्मक पहल में पूरी मजबूती से उनके साथ रहेगा।
यह बयान किसान संगठनों और अल्पसंख्यक समाजों के बीच सहयोग और समझदारी के एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है, जो महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देशभर के लिए प्रेरणादायी बन सकता है।
