मोदी ने खोजा भाइयों को क्यों शामिल किया, मैं बताता हूं’: तेलंगाना में वक्फ कानून पर ओवैसी का हमला

वक्फ कानून और UCC पर ओवैसी का तीखा हमला: मोदी सरकार की नीतियों को बताया ‘संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ’
हैदराबाद/तेलंगाना – ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आज एक जनसभा में केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने वक्फ कानून, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नीतियों को संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ बताया।
ओवैसी ने वक्फ कानून में संशोधन को लेकर कहा, “यह देश एक गुलदस्ता है। अगर आप उस गुलदस्ते से एक फूल निकाल देंगे तो वह गुलदस्ता नहीं रहेगा। अगर हिंदू, सिख और ईसाई धर्म के बोर्ड में उनके अपने धर्म के लोग ही सदस्य बन सकते हैं, तो मुस्लिम वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम कैसे सदस्य हो सकते हैं?”
उन्होंने दावा किया कि खोजा समुदाय के नाम पर वक्फ संपत्ति की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए। “मोदी जी ने कहा कि खोजा भाइयों ने आकर हमसे आग्रह किया, इसलिए उन्हें जोड़ा गया। लेकिन असल कारण यह है कि देश के सबसे अमीर व्यक्ति ने मुंबई में खोजा भाइयों के यतीमखाने की जमीन पर बंगला बना लिया है, जिसे बचाने के लिए यह सब किया गया,” ओवैसी ने आरोप लगाया।
UCC पर भी साधा निशाना
ओवैसी ने उत्तराखंड में लागू यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “यूसीसी लागू कर दिया लेकिन कहा गया कि यह हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली या आदिवासियों पर लागू नहीं होगा। क्यों नहीं होगा? अगर मैं अपनी शादी और तलाक अपने धार्मिक कानून के तहत करना चाहता हूं, तो मुझे क्यों रोका जा रहा है?”
व्यंग्यात्मक अंदाज़ में उन्होंने कहा, “मोदी जी कहते हैं कि तलाक कैसे देना है, यह वे बताएंगे। फिर यह भी बता दीजिए कि भाभी कहां हैं?” — यह बयान सभा में मौजूद लोगों के बीच ठहाके का कारण बना।
मदरसों और मुस्लिम संपत्तियों पर कार्रवाई को बताया एकपक्षीय
ओवैसी ने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और गुजरात में मदरसों और मुस्लिम इलाकों पर की जा रही कार्रवाई को लेकर भी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड में 170 मदरसों पर आपत्ति जताई गई क्योंकि वे रजिस्टर्ड नहीं थे। यूपी में 350 मदरसों और मस्जिदों पर निशानदेही की गई और कई को गिरा दिया गया। गुजरात में तो बांग्लादेशी बताकर सैकड़ों मुस्लिम घरों को ध्वस्त कर दिया गया।”
‘वक्फ बोर्ड बन गया पोस्ट ऑफिस’
अंत में ओवैसी ने केंद्र सरकार की नीतियों को संघीय ढांचे और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए कहा, “वक्फ बोर्ड इस कानून के तहत एक पोस्ट ऑफिस बन चुका है, जिसकी भूमिका केवल औपचारिक रह गई है। रूल बनाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है, तो राज्य सरकार क्या अचार डालने के लिए बैठी है?”
ओवैसी के इन बयानों से सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि केंद्र और विपक्ष के बीच वक्फ संपत्ति, UCC और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर बहस और तेज़ होगी।
