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विदर्भ में BJP और ABVP को मजबूत करने वाले पूर्व विधायक डॉ. रामदास आंबटकर का निधन

नागपुर: विदर्भ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व विधायक डॉ. रामदास आंबटकर का दुखद निधन हो गया है। उन्होंने नागपुर के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शोक व्यक्त किया है।

वर्धा जिले के वडनेर गांव निवासी डॉ. आंबटकर का सामाजिक और राजनैतिक सफर स्वयंसेवक से लेकर विधायक तक का रहा। वे बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारों से प्रभावित थे और आजीवन उन मूल्यों पर चलकर समाजसेवा करते रहे।

डॉ. आंबटकर का जन्म 1 जुलाई 1960 को हुआ था। उनके पिता तीन बार भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे थे और उन्होंने भी संघ के विचारों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का निश्चय किया। वे 1965 में स्कूल के दिनों में ही RSS से जुड़ गए थे।

1979 में वे यवतमाल में ABVP के स्वयंसेवक बने और 1982 में यवतमाल शहर के सरचिटणीस, 1984 में विस्तारक और फिर पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। 1985 में वे अमरावती जिले के जिला संगठन सचिव बने और 1987 में ABVP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बनाए गए। उन्होंने विदर्भ में संगठन को विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई।

शैक्षणिक रूप से उन्होंने 1985 में स्नातक और 1992 में B.A.S. की डिग्री RTM नागपुर विश्वविद्यालय से प्राप्त की। वे 1995 में नागपुर विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य, 2000 में स्थायी समिति के सदस्य और 2005 में प्रबंधन परिषद के सदस्य बने।

राजनीतिक रूप से उन्होंने 2004 में भाजपा में संगठन सचिव के रूप में प्रवेश किया। 2006 में पश्चिम विदर्भ में पार्टी विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई और अमरावती में वरिष्ठ नेता प्रो. बी.टी. देशमुख को हराने की रणनीति सफलतापूर्वक बनाई, जिससे डॉ. रणजीत पाटिल की जीत संभव हुई।

2015 में उन्हें भाजपा महाराष्ट्र का सरचिटणीस नियुक्त किया गया और वर्तमान में वे वर्धा, चंद्रपुर और गढ़चिरोली जिलों का विधान परिषद में प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

डॉ. आंबटकर के परिवार में पत्नी, एक बेटा, एक बेटी सहित बड़ा परिवार है। उनके निधन से भाजपा को अपूरणीय क्षति हुई है।

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