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पुणे के गांवों में बाहरी मुसलमानों के नमाज पर रोक, साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने से ग्राम पंचायतों का फैसला

पुणे जिले के मुलशी तहसील के कई गांवों—जैसे घोटवडे, पिरंगुट, वडकी और लवले—में साम्प्रदायिक तनाव के बीच ग्राम पंचायतों ने बाहरी मुसलमानों के मस्जिद में नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है। यह फैसला पहलगाम आतंकी हमले के बाद सामने आया है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

ग्राम पंचायतों ने प्रस्ताव पास कर यह तय किया कि अब केवल स्थानीय निवासी ही गांव की मस्जिदों में नमाज अदा कर सकेंगे। सार्वजनिक स्थानों पर बैनर लगाकर इस फैसले की जानकारी दी गई है। प्रस्ताव में तर्क दिया गया कि शुक्रवार को मस्जिदों में भीड़ बढ़ने से कानून-व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

मुस्लिम समाज में डर का माहौल

लवले गांव के निवासी शाइस्ताखान इनामदार ने कहा, “हम पहले ही मस्जिद की बजाय शेड में नमाज पढ़ते थे, अब हालात और डरावने हो गए हैं।” पिरंगुट सुन्नी मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष नबीलाल शेख ने बताया कि यह मस्जिद पूरे तालुका की सबसे बड़ी मस्जिद है और यहां बाहर से लोग नमाज के लिए आते हैं, लेकिन अब रिश्तेदारों का आना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा, “76 साल में पहली बार ऐसा माहौल देखा है।”

पुलिस की प्रतिक्रिया

पिरंगुट के पुलिस पाटिल प्रकाश पवले ने कहा कि यह निर्णय गांव की शांति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अनिल विभुते ने बताया कि किसी मुस्लिम व्यक्ति ने अब तक औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है और निर्णय सभी समुदायों की सहमति से लिया गया है।

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