तुर्की के पाकिस्तान समर्थन पर ओवैसी का तीखा हमला, कहा – भारत में पाकिस्तान से ज्यादा सम्मानित मुस्लिम रहते हैं

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तुर्की के पाकिस्तान समर्थन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि तुर्की को अपने इस रुख पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि भारत और तुर्की के ऐतिहासिक संबंध काफी पुराने और गहरे हैं।
ओवैसी ने कहा, “तुर्की को यह याद दिलाने की जरूरत है कि वहां का एक प्रसिद्ध बैंक ‘इसबैंक’ (İşbank) है, जिसकी स्थापना के समय भारत के लोगों ने उसमें धन जमा कराया था। भारत में 20 करोड़ से ज्यादा सम्मानित मुस्लिम रहते हैं – जो संख्या में पाकिस्तान से कहीं अधिक हैं।”
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान ने जिस तरह का व्यवहार अब तक किया है, उसका इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है। तुर्की को यह समझना होगा कि भारत में मुस्लिम शांतिपूर्ण ढंग से रहते हैं और भारतीय लोकतंत्र इसका उदाहरण है।”
PM को करना चाहिए था युद्धविराम की घोषणा: ओवैसी
ओवैसी ने भारत और अमेरिका के संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “मैं पहले भी कह चुका हूं और दोबारा कहता हूं – युद्धविराम की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी को करनी चाहिए थी, न कि अमेरिकी राष्ट्रपति को।”
उन्होंने सवाल किया, “क्या अमेरिका गारंटी दे सकता है कि पाकिस्तान अब भारत पर आतंकवादी हमले नहीं करेगा? पाकिस्तान की सेना बार-बार भारत के खिलाफ साजिश करती रही है। कब तक हम इसे बर्दाश्त करेंगे?”
ओवैसी ने अमेरिका से मांग की कि वह पाकिस्तान समर्थित संगठन ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित करे। उन्होंने कहा कि TRF असल में लश्कर-ए-तैयबा का ही एक दूसरा चेहरा है।
सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल पर ओवैसी का बयान
ओवैसी ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद बनने वाले सात सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को लेकर कहा, “पहलगाम की दुर्भाग्यपूर्ण घटना और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि हम वैश्विक मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखें।”
उन्होंने कहा कि जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब भी प्रतिनिधिमंडल गया था, और 2008 में भी एक ऐसा प्रयास हुआ था। अब जब भारत स्पष्ट रूप से आतंकवाद के खिलाफ है, तो यह प्रतिनिधिमंडल उसी संदेश को दुनिया के सामने रखेगा।
ओवैसी ने बताया कि वे जिस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, उसका नेतृत्व बीजेपी नेता बैजयंत जय पांडा करेंगे। इस दल में निशिकांत दुबे, फंगनन कोन्याक, रेखा शर्मा, सतनाम सिंह संधू और गुलाम नबी आजाद जैसे नेता शामिल होंगे। ये प्रतिनिधिमंडल यूके, फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, इटली और डेनमार्क जैसे देशों का दौरा करेगा।
भारत का स्पष्ट संदेश – आतंकवाद के खिलाफ कोई नरमी नहीं
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। यह प्रतिनिधिमंडल भारत की इस नीति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करेगा और साझेदार देशों से कड़े कदम उठाने की मांग करेगा।
