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अभिव्यक्ति या अपराध? मेरठ में युवक ने अंबेडकर प्रतीक को पैरों तले रौंदा, दलित संगठनों में गुस्सा”

अंबेडकर झंडे का अपमान: मेरठ के युवक के वीडियो से भड़का देश, दलित संगठनों में उबाल

मेरठ के शास्त्री नगर निवासी युवक हार्दिक पंडित का एक आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसमें वह बाबा साहब अंबेडकर के प्रतीक झंडे पर जानबूझकर पैर रखता हुआ नजर आ रहा है। यह वीडियो सामने आने के बाद देशभर में आक्रोश की लहर दौड़ गई है, खासकर दलित संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच। ट्विटर पर #ArrestHardikPandit ट्रेंड कर रहा है और @Uppolice को टैग कर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की जा रही है।

वीडियो में हार्दिक पंडित हंसते हुए अपने कृत्य को “अभिव्यक्ति की आज़ादी” बता रहा है। सोशल मीडिया प्रोफाइल खंगालने पर पता चला कि वह पहले भी विवादास्पद पोस्ट करता रहा है और खुद को “हिंदू राष्ट्र समर्थक” बताता है।

घटना के बाद मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर समेत कई जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। भीम आर्मी, BAMCEF और अन्य दलित संगठनों ने आरोप लगाया कि यह महज एक युवक की करतूत नहीं, बल्कि अंबेडकरवाद के खिलाफ गहरी साजिश है। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मेरठ पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए हार्दिक को हिरासत में ले लिया है। पुलिस अधीक्षक (नगर) के अनुसार वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और FIR दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।

कानूनी विशेषज्ञों ने बताया कि यह कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 153A, 295A तथा SC/ST एक्ट के तहत संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें बिना देर किए गिरफ्तारी और केस दर्ज होना चाहिए।

यह घटना न केवल बाबा साहब के प्रतीक का अपमान है, बल्कि संविधान, समता और सामाजिक न्याय की मूल भावना पर हमला है। यह सवाल भी उठता है कि क्या अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर अब नफरत फैलाना और संविधान को नीचा दिखाना सामान्य होता जा रहा है?

बाबा साहब अंबेडकर का योगदान किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं बल्कि पूरे देश के लिए है। उनका अपमान लोकतंत्र और समानता का अपमान है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

अब देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संविधान की रक्षा में कानून सख्ती से काम करेगा या फिर यह मामला भी बाकी मामलों की तरह भुला दिया जाएगा।

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