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अतिक्रमण अधिकारी पंडित पवार पर गंभीर आरोप! — तबादले के बाद भी कुर्सी बरकरार, मिलीभगत और भ्रष्टाचार का खुला खेल — साद बिन मुबारक का बड़ा खुलासा

जालना / क़ादरी हुसैन

जुना जालना क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमणों को लेकर नगर पालिका प्रशासन की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। सहायक आयुक्त सुप्रिया चव्हाण द्वारा जारी लिखित आदेशों को नज़रअंदाज़ कर अतिक्रमण अधिकारी पंडित पवार ने कार्रवाई से किनारा कर लिया है, जिससे स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष फैल गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जुना जालना विभाग के कई इलाकों में अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता साद बिन मुबारक ने बार-बार शिकायतें दर्ज की थीं। इन शिकायतों के आधार पर सहायक आयुक्त सुप्रिया चव्हाण ने अतिक्रमण अधिकारी पंडित पवार को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके, पवार ने आदेशों का पालन नहीं किया और अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अधिकारी पंडित पवार वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी करते हैं, फ़ोन कॉल्स से बचते हैं, और कार्रवाई को जानबूझकर टालते रहते हैं। नागरिकों का यह भी कहना है कि कुछ अतिक्रमणकर्ताओं के साथ उनकी मिलीभगत हो सकती है, जिसके कारण कार्रवाई रुक गई है।

नागरिकों ने सवाल उठाया है —

“क्या पंडित पवार राजनीतिक संरक्षण में कार्य कर रहे हैं, इसीलिए प्रशासन उनके विरुद्ध मौन है?”

सामाजिक कार्यकर्ता साद बिन मुबारक ने कहा कि वे इस मामले को अब न्यायालय तक ले जाने वाले हैं।
उन्होंने कहा —

“मैं इस अन्याय के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल करूँगा। जब तक दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक मैं पीछे नहीं हटूँगा।”

सूत्रों के अनुसार, यह पहला मौका नहीं है जब पंडित पवार पर लापरवाही के आरोप लगे हों। पूर्व में भी उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज की गई थीं। उनका परतूर तबादला आदेशित किया गया था, किंतु बाद में उन्हें कार्यावधि में मुदतवाढ (विस्तार) दे दिया गया। आश्चर्य की बात यह है कि इस मुदतवाढ की अवधि आदेश में स्पष्ट नहीं की गई, जिससे नागरिकों में और अधिक संदेह गहराता जा रहा है।

नगरपालिका प्रशासन द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट लिखा गया है —

“जुना जालना विभाग के भवानी नगर से लेकर जमील मौलाना के घर तक, बाजार चौकी से टटुपुरा, अल्फा होटल मिलन चौक, कुच्चरवटा दुःखी नगर के डी.पी. रोड से लेकर चायनीज़ शॉप तक तथा शनिमंदिर से बाजार चौकी तक के मार्गों पर बढ़े हुए अतिक्रमणों को तत्काल हटाने की कार्यवाही की जाए।”

साथ ही आदेश में यह भी निर्देश दिया गया है —

“अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूर्ण रूप से की जानी चाहिए, केवल चार या पाँच अतिक्रमण हटाकर खानापूर्ति न की जाए।”

नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि अतिक्रमण अधिकारी पंडित पवार की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कर उनकी कार्यावधि बढ़ाने का निर्णय तत्काल रद्द किया जाए, तथा दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को विवश होंगे।

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