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औरंगाबाद: गोवंश हत्या प्रतिबंध कानून पर उठी आपत्ति, निर्दोषों की जान बचाने के लिए कड़ा मॉब लिंचिंग कानून बनाने की मांग

औरंगाबाद के हज हाउस में मुस्लिम नुमाइंदा काउंसिल की ओर से ज्वलंत मुद्दों पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता एवं उच्च न्यायालय के जाने-माने विधिज्ञ सुभाष सवंगिकर ने गोवंश हत्या प्रतिबंध कानून के कारण देश और राज्य में दो समाजों के बीच बढ़ रही खाई पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस कानून के नाम पर मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसमें निर्दोष लोगों की जान जा रही है। संविधान सभी को व्यापार और व्यवसाय करने का अधिकार देता है। 1977 में लाए गए गोहत्या कानून को सभी ने स्वीकार किया था और किसी ने विरोध नहीं किया था, लेकिन महायुती सरकार ने 2015 में इसमें संशोधन कर नया गोवंश कानून लागू किया, जिसका राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पशु परिवहन करने वाले वाहनों को रोककर व्यापारियों से मारपीट की जा रही है। कुरैशी समाज का राज्यव्यापी बंद जारी है और उनकी मांगें न्यायसंगत हैं। सवंगिकर ने कहा कि सरकार इस कानून को रद्द करे और केंद्र सरकार पूरे देश के लिए एक समान कानून बनाए, जिससे किसी निर्दोष की जान न जाए। साथ ही मॉब लिंचिंग पर कड़ा कानून बनाया जाए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नुमाइंदा काउंसिल के अध्यक्ष जियाउद्दीन सिद्दीकी ने की। इस मौके पर शहर के डीपी प्लान में मस्जिदों और कब्रिस्तानों जैसे मुस्लिम धार्मिक स्थलों के बाधित होने के मुद्दे पर चर्चा हुई। एड. महबूब खान (सेवानिवृत्त सचिव, मनपा एवं हाईकोर्ट अधिवक्ता) ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार 1947 से मौजूद धार्मिक संरचनाओं को नहीं हटाया जा सकता, ऐसे में सड़क का रूट बदलकर डीपी प्लान में संशोधन संभव है। अतीत में भी धार्मिक स्थलों को बचाने के लिए रूट बदले गए थे और वक्फ बोर्ड ने इसमें अहम भूमिका निभाई थी।

एड. अभय टाकसाल ने महाराष्ट्र नागरिक सुरक्षा कानून को मंजूरी न देने की अपील की और इसके नकारात्मक प्रभाव बताए। धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने के फैसले पर न्यायालय के आदेश और अनुमति प्रक्रिया पर एड. खान सलीम खान ने मार्गदर्शन दिया। वक्फ अनुसंधान कानून-2025 को रद्द करने की मांग पर अब्दुल रऊफ और मुफ्ती अनिसुर्रहमान ने अपने विचार रखे।

कार्यशाला में सात प्रस्ताव पारित किए गए। कार्यक्रम का संचालन एड. फैज सैयद और एड. अन्वरुल इशाअती ने किया। इस दौरान काउंसिल के महासचिव मेअराज सिद्दीकी, मोहम्मद हिशाम उस्मानी, कामरान अली खान, मोईद हशर सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।

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