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नगर परिषद चुनाव में दिग्गजों के खिलाफ आम आदमी पार्टी का ‘सादा संघर्ष’ — जनता के लिए बिना खर्च, बिना दिखावे की राजनीति का नया अध्याय

भोकरदन/करीम लाला 

आगामी नगर परिषद चुनावों में आम आदमी पार्टी ने एक अनोखा और साहसी प्रयोग करने का निर्णय लिया है। करोड़ों की संपत्ति रखने वाले प्रभावशाली नेताओं और तथाकथित दिग्गजों के खिलाफ अब यह पार्टी “सादगी, ईमानदारी और जनता के हित” की राजनीति को केंद्र में रखकर चुनावी मैदान में उतरने जा रही है।

पार्टी के जिला सचिव बोरसे गुरुजी ने जारी प्रेस नोट में कहा कि —
“शहरों में कई धनाढ्य और प्रभावशाली नेता हैं, जो पैसों से अमीर लेकिन मन से गरीब और स्वार्थी हैं। इन लोगों ने वर्षों तक गरीब जनता की भावनाओं का शोषण किया। चुनाव जीतने के बाद नगर परिषद का धन अपने स्वार्थ, परिवार और निजी योजनाओं में खर्च करना ही उनका धंधा बन गया है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहने वाले और सत्ता से बाहर दोनों ही तरह के नेता दलाली, कमीशनखोरी और दबाव की राजनीति में लिप्त रहे हैं। बावजूद इसके जनता को आज भी सफाई, पानी, सड़क, नालियां, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

बोरसे गुरुजी ने बताया कि —
“पिछले चार वर्षों में आम आदमी पार्टी ने नगर परिषद प्रशासन को जवाबदेह बनाने के लिए निरंतर संघर्ष किया है। हमने घर-घर जाकर नागरिक समस्याएं सुनीं और कई मुद्दों को सुलझाने में सफलता पाई। उस समय यह सारे तथाकथित दिग्गज केवल मज़ाक उड़ा रहे थे, लेकिन आज जनता का विश्वास आम आदमी पार्टी के साथ है।”

पार्टी ने स्पष्ट किया है कि इस बार नगर परिषद चुनाव में केवल साधे, ईमानदार और समाजसेवी प्रवृत्ति के उम्मीदवार ही मैदान में उतारे जाएंगे। चुनाव प्रचार में दिखावा या धन का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा, बल्कि “जनता से संवाद और विकास का संकल्प” ही प्रचार का आधार रहेगा।

यदि जनता ने आम आदमी पार्टी को जनादेश दिया, तो नगर परिषद के माध्यम से हर नागरिक को बिना किसी खर्च और बिना सिफारिश के, सभी सुविधाएं घर-घर तक पहुंचाई जाएंगी।
साथ ही “स्वच्छ शहर, सुंदर शहर” अभियान के तहत केळना नदी का सौंदर्यीकरण, साफ-सुथरे रस्ते, बेहतर जल व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

पार्टी के पदाधिकारी — जिला सचिव बोरसे गुरुजी, उपाध्यक्ष महजाद खान और कार्यकारिणी सदस्य भगवान पालकर — ने विश्वास जताया कि जनता परिवर्तन की इस लड़ाई में आम आदमी पार्टी का साथ देगी और इस बार गरीबों व मध्यमवर्गीय नागरिकों की आवाज़ नगर परिषद में गूंजेगी।

पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो उच्च शिक्षित, स्वच्छ छवि वाले, स्वयंसेवी और स्वतंत्र विचारों वाले नागरिक आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्हें पार्टी “ए बी फॉर्म” देकर पूरा समर्थन देगी। फिलहाल 22 इच्छुक उम्मीदवारों की सूची पार्टी नेतृत्व को भेजी गई है।


खान एजाज़ अहमद की संकल्पना से प्रेरित — “बिना खर्च की राजनीति” का पुनर्जागरण

औरंगाबाद —
बिना पैसों के, बिना तामझाम और बिना दिखावे के, केवल जनता के हित में राजनीति करने की जो संकल्पना खान एजाज़ अहमद ने दी थी, उसी विचारधारा को अब आम आदमी पार्टी ने अपने चुनावी अभियान का आधार बनाया है।

वर्ष 2009 के औरंगाबाद लोकसभा चुनाव में खान एजाज़ अहमद ने बिना आर्थिक साधनों और प्रचार तामझाम के चुनाव लड़ा था। बावजूद इसके उन्होंने 23 उम्मीदवारों में पांचवां स्थान प्राप्त कर यह साबित किया कि ईमानदारी और सादगी भी राजनीति में प्रभाव पैदा कर सकती है।

उनका यह “बिना खर्च का चुनाव अभियान” आज भी जनसेवा और पारदर्शी राजनीति का प्रतीक माना जाता है।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए आम आदमी पार्टी ने आगामी चुनावों में भी “बिना खर्च और स्वच्छ राजनीति” के सिद्धांत पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए खान एजाज़ अहमद ने कहा —
“जनता के हित में सादगी और पारदर्शिता ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। यदि यह विचार धरातल पर उतरा, तो देश की राजनीति में एक नई दिशा स्थापित होगी।”

उन्होंने आम आदमी पार्टी को इस साहसिक कदम के लिए बधाई देते हुए उनके विजय और जनसेवा के निरंतर प्रयासों की सफलता की कामना की।

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