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औरंगाबाद नगर निगम चुनाव की आरक्षण सोडत घोषित — कई दिग्गज नेताओं को झटका, अब तलाशना होगा नया प्रभाग

औरंगाबाद/प्रतिनिधि 

औरंगाबाद नगर निगम चुनाव की तैयारियां अब जोर पकड़ने लगी हैं। मंगलवार को 115 सीटों के लिए आरक्षण सोडत (ड्रॉ) घोषित की गई, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस आरक्षण की प्रक्रिया में कई बड़े और पूर्व नगरसेवकों को गहरा झटका लगा है, क्योंकि उनके प्रभाग अब आरक्षित श्रेणियों में चले गए हैं। ऐसे में उन्हें चुनाव लड़ने के लिए नए प्रभाग तलाशने पड़ेंगे।

इस सूची में कई दिग्गजों के नाम शामिल हैं — उद्धव ठाकरे गट से शिंदे गट में शामिल हुए पूर्व महापौर नंदकुमार घोडेले, भाजपा के पूर्व स्थायी समिति अध्यक्ष दिलीप थोरात, भाजपा में आए कैलास गायकवाड और विधानसभा चुनाव लड़ चुके राजू शिंदे।

जानकारी के अनुसार, नंदकुमार घोडेले का नक्षत्रवाडी प्रभाग तीन सदस्यीय है, जिसमें अब एससी (पुरुष), ओबीसी (महिला) और सर्वसाधारण (महिला) के लिए सीटें आरक्षित हुई हैं। ऐसे में घोडेले की पत्नी अनीता घोडेले ओबीसी महिला प्रवर्ग से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। खुद घोडेले अब सातारा-देवळाई क्षेत्र में नया विकल्प खोज सकते हैं।

भाजपा नेता दिलीप थोरात प्रभाग क्रमांक 21 से चुनाव लड़ने के इच्छुक थे, लेकिन यहां तीनों सीटें आरक्षित हो गईं। केवल एक खुली श्रेणी की सीट बची है, जहां उम्मीदवारों की लंबी कतार है। ऐसे में थोरात की उम्मीदों पर भी संशय के बादल हैं।

उद्धव सेना से विधानसभा चुनाव लड़ चुके राजू शिंदे भी नई सीट की तलाश में हैं। वे पहले एन-1 क्षेत्र (प्रभाग क्रमांक 10) से चुनाव जीतते रहे हैं। इस प्रभाग में अब ओबीसी महिला, सर्वसाधारण महिला और दो सामान्य सीटें हैं, इसलिए उन्हें सामान्य श्रेणी से चुनाव लड़ना पड़ सकता है।

वहीं, प्रभाग क्रमांक 27 से इच्छुक कैलास गायकवाड को भी झटका लगा है क्योंकि यहां एससी महिला आरक्षण निकला है। इसी तरह, अरुण बोर्डे के प्रभाग क्रमांक 28 में भी एससी महिला आरक्षण घोषित हुआ, जिसके चलते उन्हें अपनी पत्नी को मैदान में उतारना पड़ सकता है।

पूर्व महापौर बापू घडामोडे ने खुद चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि परिवार से भी कोई विशेष रूप से इच्छुक नहीं है, लेकिन यदि पार्टी कहेगी तो पुनर्विचार किया जा सकता है।

एमआईएम के पूर्व गटनेता और दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके नासेर सिद्दीकी ने भी इस बार चुनाव न लड़ने का संकेत दिया है। उनका प्रभाग करीब 15 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है, और उनके सामने वंचित बहुजन आघाडी के अफसर खान के उतरने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर पार्टी निर्देश देगी तो वे चुनाव जरूर लड़ेंगे।

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