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समता का सूर्य भले अस्त हुआ, लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए अमर प्रकाश छोड़ गया — डॉ. गोपाल बच्छीरे

लोणार/फिरदोस खान पठान

06 दिसंबर 1956 को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर लोणार के भीमनगर बुद्ध विहार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में डॉ. गोपाल बच्छीरे ने कहा कि “समता का सूर्य उस दिन जरूर मावळा, लेकिन लाखों आने वाली पीढ़ियों के लिए इतना प्रकाश छोड़ गया जो सदियों तक मार्गदर्शन करता रहेगा।”

बुद्ध–आंबेडकर विचारों ने बदला भारतीय समाज
कैंडल मार्च के समापन के बाद आयोजित अभिवादन सभा में डॉ. बच्छीरे ने कहा कि गौतम बुद्ध द्वारा दिए गए स्वातंत्र्य, समता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर ही डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने भारत का संविधान बनाया। बाबासाहेब ने केवल दलित, शोषित और वंचित समाज का ही उत्थान नहीं किया, बल्कि बहुजन, अल्पसंख्यक और विशेष रूप से महिलाओं को अधिकार दिलाने का काम किया।

उन्होंने कहा कि कभी महिलाओं के पास संपत्ति का अधिकार नहीं था, शिक्षा का अधिकार नहीं था, यहाँ तक कि विधवा महिलाओं को जीने का अधिकार भी नहीं था। लेकिन संविधान के माध्यम से डॉ. आंबेडकर ने महिलाओं को समानता और सम्मान का अधिकार दिलाया, जिसके कारण भारत जैसे देश में एक विधवा महिला भी प्रधानमंत्री बन सकी।

कार्यक्रम में विविध मान्यवरों की उपस्थिती
कार्यक्रम में श्री गजानन जाधव और श्री सुदन अंभोरे ने भी अपने विचार रखे। आयोजन का कार्य तानाजी अंभोरे ने संभाला। कार्यक्रम में लूकमान कुरेशी, शेख सादिक, योगेश भुक्कन, ओवैस कुरेशी, अशफाक खान, फहीम खान, इकबाल कुरेशी, उमेश मोरे, अशोक मोरे, उमेश कुटे, डॉ. रंजना बच्छिरे, पार्वतीताई सुटे, शालिनीताई मोरे, नीताबाई अंभोरे, रोशन अंभोरे, किशोर बच्छिरे, ज्ञानेश्वर दूधमोगरे, जीवन अंभोरे, दीपक अंभोरे, समरजीत बच्छिरे, अनिल मोरे, अशोक सरदार सहित अनेक मान्यवर उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन तानाजी अंभोरे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन उमेश मोरे ने किया।

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