नेपाल तक पहुँचीं बदनापूर की दो किशोरियाँ, पुलिस ने सुरक्षित घर पहुँचाया; परिजनों ने किया सम्मान

जालना/कादरी हुसैन
बदनापूर और मांजरगांव की दो नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी से चिंतित परिवार आज राहत की सांस ले सके, जब बदनापूर पुलिस ने लगातार नौ दिनों की अथक खोजबीन के बाद दोनों बच्चियों को सकुशल परिजनों तक पहुँचा दिया। पुलिस की तत्परता, तकनीकी जांच और व्यापक खोज ऑपरेशन की बदौलत यह संवेदनशील मामला सफलतापूर्वक सुलझाया गया।
घटना 1 दिसंबर से शुरू हुई, जब 14 वर्षीय और 15 वर्षीय दोनों बच्चियाँ सुबह स्कूल कार्यक्रम का बहाना बताकर निकलीं, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटीं। परिवार के लगातार प्रयासों के बावजूद कोई पता न चलने पर देर रात पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई।
मामला गंभीर था। पुलिस निरीक्षक एम.टी. सुरवसे ने बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाने का अपराध दर्ज कर तीन पथक तैयार किए। एक टीम को बिहार-उत्तर प्रदेश-नेपाल, दूसरी को मुंबई, और तीसरी को स्थानीय क्षेत्रों में जांच के लिए भेजा गया। तकनीकी जांच में पता चला कि दोनों लड़कियाँ लोकेशन छुपाने के लिए मोबाइल और सिम बंद रखती थीं, लेकिन जहां-जहां उन्हें इंटरनेट मिला, वहाँ से व्हाट्सऐप सक्रिय हुआ।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि दोनों बच्चियाँ बदनापूर से जालना, फिर मुंबई, उसके बाद जैननगर (बिहार), और फिर जनकपुर (नेपाल) तक पहुँच चुकी थीं—करीब 2000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए। जनकपुर में उन्होंने जानकी मंदिर और आसपास के इलाकों का भ्रमण भी किया। जनकपुर रेलवे स्टेशन पर इंटरनेट एक्टिविटी के साक्ष्य मिलने पर अपर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी ने बिहार और नेपाल पुलिस से संपर्क कर एक विशेष पथक नेपाल भेजा।
इसी दौरान महत्वपूर्ण सुराग मिला—दोनों बच्चियाँ नेपाल से वापसी की ट्रेन में मुंबई की ओर आ रही थीं। यात्रा में उनकी मुलाकात आदित्य झा नामक यात्री से हुई, जिसने मुंबई में उन्हें कमरा ढूँढने में मदद का आश्वासन दिया। इंटरनेट उपयोग की लोकेशन से पता चला कि वे जैन नगर से पवन एक्सप्रेस में ठाणे पहुँचने वाली हैं। इसके बाद दूसरी टीम को कळवा-ठाणे क्षेत्र में भेजा गया। कळवा में दोनों लड़कियाँ सुरक्षित मिल गईं और पुलिस ने उन्हें तुरंत अपनी सुरक्षा में लेकर जालना पहुँचाया।
आज जब बच्चियाँ घर पहुँचीं, तो परिवार की आँखों में भावुक खुशी झलक रही थी। परिजन बदनापूर पुलिस स्टेशन पहुँचे, मिठाई का वितरण किया और पुलिस अधीक्षक अजय कुमार बंसल को पुष्पगुच्छ देकर धन्यवाद व्यक्त किया। सतिश आरसुळ, बद्रीनाथ आरसुळ, सिद्धेश शेलके तथा डॉ. रामेश्वर पाटिल ने भी पुलिस टीम का आभार जताया।
यह पूरा खोज अभियान पुलिस अधीक्षक अजय कुमार बंसल, अपर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी और उपविभागीय पुलिस अधिकारी अनंत कुलकर्णी के मार्गदर्शन में सफल हुआ। टीम में पुलिस निरीक्षक एम.टी. सुरवसे, सहायक पुलिस निरीक्षक स्नेहा करेवाड़, उपनिरीक्षक अजय जैस्वाल, पुलिस कांस्टेबल गोपाल बरवाळ, परमेश्वर ढगे, अनिल पिल्लेवाड, सागर बाविस्कर और संदीप मांठे का सराहनीय योगदान रहा।
यह मामला न केवल पुलिस की तकनीकी दक्षता और मेहनत का उदाहरण है, बल्कि परिजनों के लिए बड़ी राहत और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है।
