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‘वॉइस ऑफ मीडिया’ का जोरदार आंदोलन तेज; राज्यभर से सैकड़ों पत्रकारों की ऐतिहासिक उपस्थिति

पहले ही दिन मुख्यमंत्री प्रतिनिधि से चर्चा—संदीप काले बोले: “सरकार ठोस भूमिका ले तभी आंदोलन वापस होगा”

जालना/कादरी हुसैन

नागपुर में शीतकालीन अधिवेशन के मौके पर पत्रकारों की समस्याओं को लेकर ‘वॉइस ऑफ मीडिया’ (VOM इंटरनेशनल फोरम) द्वारा यशवंतराव चव्हाण स्टेडियम में शुरू किया गया आंदोलन पहले ही दिन राज्यव्यापी शक्ति प्रदर्शन में बदल गया। डिजिटल मीडिया, प्रिंट, साप्ताहिक, रेडियो और फील्ड पत्रकारों सहित विभिन्न माध्यमों से जुड़े सैकड़ों पत्रकारों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया। दर्जनों जिलों से लगातार आ रहे पत्रकारों ने आंदोलन को अभूतपूर्व समर्थन दिया है।

आंदोलन स्थल पर पहले ही दिन माहौल बेहद तीव्र रहा, जहां संगठन ने पत्रकारिता से जुड़े 33 अहम मुद्दों पर तत्काल निर्णय की मांग उठाई। प्रमुख मांगों में—पत्रकार महामंडल लागू कर 300 करोड़ की निधि, अटके सरकारी बिलों का भुगतान, 200% दरवृद्धि, पत्रकार सुरक्षा कानून को प्रभावी बनाना, डिजिटल मीडिया को मान्यता, स्वास्थ्य–दुर्घटना बीमा, पेंशन योजना, 2% हाउसिंग कोटा, महिला पत्रकारों की सुरक्षा व्यवस्था और पत्रकार संरक्षण प्रणाली जैसे मुद्दे शामिल हैं।


वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्यमंत्री प्रतिनिधि की मंच पर मौजूदगी

आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए नागपुर पुलिस आयुक्त रविंद्र सिंगल, अतिरिक्त आयुक्त नवीनचंद रेड्डी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी पहले ही दिन आंदोलन स्थल पर पहुँचे।

सबसे महत्त्वपूर्ण क्षण तब आया, जब
मुख्यमंत्री दूत ओमप्रकाश शेटे
(अध्यक्ष – आयुष्मान भारत मिशन, महाराष्ट्र समिति)
स्वयं आंदोलन स्थल पर पहुंचे और पत्रकार प्रतिनिधियों की सीधी बातचीत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से करवाई। उन्होंने पत्रकारों की मांगों पर सरकार का रुख जानने की कोशिश की और आश्वासन दिया कि समाधान के लिए वे विशेष रूप से भेजे गए हैं।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से विधायक हेमंत पाटिल और विधायक बाबुराव कोहलीकर भी पहुंचे और आंदोलनकारियों से विस्तृत चर्चा की। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी—किशोर करंजेकर, दिलीप घोरमारे, राहुल सावजी—ने उनसे विस्तृत मुद्दे रखे।


“सरकार समय निकाल रही है, ठोस भूमिका ले तभी आंदोलन वापस होगा”—संदीप काले

संगठन के संस्थापक एवं अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष
संदीप काले
ने स्पष्ट कहा कि पत्रकारों की मांगें वर्षों से उपेक्षित रही हैं। कई मुद्दों पर सरकार तुरंत निर्णय ले सकती है, लेकिन जानबूझकर टालमटोल किया जा रहा है।
उन्होंने दोहराया—
“जब तक सरकार ठोस और लिखित भूमिका नहीं लेती, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।”

वॉइस ऑफ मीडिया के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष
अनिल म्हस्के
ने राज्य के सभी जिलाध्यक्षों तथा पत्रकार साथियों से अपील की कि वे आंदोलन को निर्णायक रूप देने के लिए पूर्ण शक्ति के साथ शामिल हों।


आंदोलन स्थल का दृश्य

यशवंतराव चव्हाण स्टेडियम में जारी अनशन व आंदोलन में राज्यभर से आए पदाधिकारियों, पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों की भारी भीड़ है। मंच पर लगातार भाषण, चर्चा और बैठकों का दौर जारी है, और माहौल पूरी तरह आंदोलनकारी बना हुआ है। लड़ाई को ‘पत्रकार अधिकारों की ऐतिहासिक लड़ाई’ बताया जा रहा है।


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