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जालना बाल बलात्कार व हत्या मामले में दया याचिका खारिज, न्याय की जीत : मौलाना इलियास खान फलाही

जालना/कादरी हुसैन

जालना में वर्ष 2012 में दो वर्षीय मासूम बच्ची के अपहरण, बलात्कार और नृशंस हत्या के मामले में दोषी रवी घुमरे की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने के निर्णय का जमात-ए-इस्लामी हिंद, महाराष्ट्र ने स्वागत किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना इलियास खान फलाही ने इस फैसले को पीड़िता के परिवार के लिए लंबे संघर्ष के बाद मिली न्यायिक राहत बताया है।

मौलाना इलियास खान फलाही ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दया याचिका अस्वीकार किया जाना यह स्पष्ट संदेश देता है कि बच्चों के विरुद्ध किए गए जघन्य और अमानवीय अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि न्याय मिलने में समय अवश्य लगा, लेकिन अंततः कानून और संविधान की विजय हुई है।

उन्होंने स्मरण कराया कि सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2019 में इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मृत्युदंड को बरकरार रखा था और इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ श्रेणी का अपराध माना था। यह घटना समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाली थी, जिसमें एक मासूम बच्ची को जानबूझकर क्रूरता का शिकार बनाया गया।

मौलाना फलाही ने पीड़िता के माता-पिता के प्रति संवेदना और एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया का मानसिक और सामाजिक कष्ट झेला है। जमात-ए-इस्लामी हिंद, महाराष्ट्र ने प्रशासन से आग्रह किया है कि कानून के दायरे में निर्धारित सजा को बिना किसी और अनावश्यक विलंब के लागू किया जाए, ताकि न्याय प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मजबूत हो।

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