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UMEED पोर्टल मामला: वक्फ बोर्ड को बड़ी राहत, महाराष्ट्र वक्फ ट्रिब्यूनल ने समय-सीमा 6 माह बढ़ाई

जालना/कादरी हुसैन

महाराष्ट्र राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल, औरंगाबाद ने वक्फ आवेदन क्रमांक 130/2025 में महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। ट्रिब्यूनल ने UMEED पोर्टल पर वक्फ संस्थानों का विवरण अपलोड करने की समय-सीमा को लेकर अहम आदेश पारित करते हुए इसे 6 माह तक बढ़ा दिया है। यह आदेश 23 दिसंबर 2025 को ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश आदिल एम. खान द्वारा पारित किया गया।

ट्रिब्यूनल ने अंतरिम आवेदन (प्रदर्श–11) को मंजूरी देते हुए स्पष्ट किया है कि वक्फ संस्थानों का विवरण अपलोड करने के लिए निर्धारित 6 माह की अवधि उस दिन से मानी जाएगी, जिस दिन UMEED पोर्टल पूरी तरह तकनीकी रूप से दुरुस्त, बिना किसी खामी के और 24×7 कार्यशील हो जाएगा। इस निर्णय से न केवल महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड, बल्कि राज्य की सभी वक्फ संस्थाओं और मुतवल्लियों को बड़ी राहत मिली है।

अदालत ने भारत संघ और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (प्रतिवादी क्रमांक 1 और 2) को निर्देश दिए हैं कि वे 10 दिनों के भीतर UMEED पोर्टल की सभी तकनीकी खामियों को दूर कर इसे पूरी तरह कार्यशील बनाएं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जब तक पोर्टल बिना किसी तकनीकी बाधा के 24×7 संचालित नहीं होता, तब तक उसे विधिवत कार्यशील नहीं माना जाएगा।

ट्रिब्यूनल ने मुख्य आवेदन के अंतिम निपटारे तक UMEED अधिनियम, 2025 की धारा 61 के तहत किसी भी वक्फ संस्था के मुतवल्ली के खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रतिकूल या दंडात्मक कार्रवाई न करने के निर्देश भी दिए हैं।

एक अहम निर्देश में ट्रिब्यूनल ने कहा है कि यदि विस्तारित अवधि के दौरान मुतवल्लियों या आवेदकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों का एक दिन के भीतर समाधान नहीं होता, या किसी भी अवधि में UMEED पोर्टल बंद रहता है अथवा तकनीकी रूप से बाधित होता है, तो उस अवधि को 6 माह की वैधानिक समय-सीमा में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों को उतना अतिरिक्त समय देना अनिवार्य होगा, जितना समय पोर्टल के गैर-कार्यशील रहने के कारण प्रभावित हुआ।

इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश राज्य की सभी वक्फ संस्थाओं और मुतवल्लियों पर समान रूप से लागू होगा। इसी कारण ट्रिब्यूनल की रजिस्ट्री किसी भी व्यक्तिगत वक्फ संस्था या मुतवल्ली की ओर से अलग से नया आवेदन स्वीकार नहीं करेगी।

उक्त आदेश के साथ ही प्रदर्श–11 के अंतरिम आवेदन का निपटारा कर दिया गया है। यह आदेश ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष आदिल एम. खान तथा मुस्लिम कानून और न्यायशास्त्र के जानकार सदस्य मोहम्मद मोहीउद्दीन मोईद द्वारा पारित किया गया।

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