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सौ. मीराताई भूषण भाऊ मापारी लोणार नगर परिषद की नगराध्यक्ष बनीं, जनमानस पर राज करने वाले नेतृत्व का नया अध्याय

 

लोणार/फिरदोस खान पठाण

लोणार के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल पदों की वजह से नहीं, बल्कि इंसानियत, काम और भरोसे के कारण जनता के दिलों में बस जाते हैं। ऐसी ही एक सशक्त पहचान हैं माननीय विश्वनाथ उर्फ कांता पाटील। जिला परिषद सदस्य के रूप में उन्होंने जनता से जो आत्मीय रिश्ता बनाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रकाशस्तंभ साबित हुआ।

इन्हीं संस्कारों की मशाल को आगे बढ़ाया भूषण विश्वनाथ मापारी ने। लोणार नगर के नगरसेवक, गटनेता से लेकर नगराध्यक्ष तक का उनका सफर सत्ता का नहीं, बल्कि सेवा का रहा है। माइक पर बोलने से ज्यादा जमीन पर काम करने वाले, जनता में घुलने-मिलने वाले और दिलों पर राज करने वाले नेता के रूप में भूषण भाऊ ने लोणार नगरी में अपनी अलग पहचान बनाई।

भूषण भाऊ के नेतृत्व की पहली मजबूत छाप शब्द का मान रखने वाली राजनीति में दिखाई देती है। समाज को प्राथमिकता देने वाले नेता, पूर्व नगरसेवक श्याम भाऊ राऊत को दिया गया वादा— “मैं आपको टिकट दिलाऊंगा”— उन्होंने न सिर्फ निभाया, बल्कि उसे साकार भी किया। परिणामस्वरूप श्याम भाऊ राऊत की पत्नी सौ. संध्या ताई श्याम भाऊ राऊत को टिकट मिला और वे विजयी रहीं। यह सफलता भूषण भाऊ की कुशल और भरोसेमंद नेतृत्व शैली का जीवंत उदाहरण बनी।

भूषण भाऊ के नेतृत्व का एक और महत्वपूर्ण पहलू है रिश्तों को निभाने की उनकी प्रवृत्ति। पुराने संबंधों और भरोसे की डोर को मजबूत करने वाला परिवार— खाना सेठ, पूर्व नगराध्यक्ष। उनके छोटे बेटे आबेद को साथ लेकर भूषण भाऊ ने लोणार नगरी में नई पहचान बनाई। आज यह जोड़ी प्रेम से “जय–वीरू की जोड़ी” के नाम से जानी जाती है— जाति और धर्म की दीवारें तोड़ने वाली, इंसानियत पर खड़ी हुई जोड़ी।

इस रिश्ते को और मजबूती देने वाला एक भावनात्मक अध्याय है इमरान खान, जो खाना सेठ के बड़े बेटे हैं। अपने भाई के लिए पीछे न रहते हुए उन्होंने सौ. मीराताई भूषण मापारी को नगराध्यक्ष बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। घर-घर जाकर जनता से सीधा संवाद करते हुए उन्होंने प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई। यह प्रचार किसी पद के लिए नहीं, बल्कि विश्वास के लिए था।

खास बात यह है कि भूषण पाटील हों या इमरान खान— दोनों माइक पर बोलने वाले नेता नहीं हैं। ये शब्दों से नहीं, बल्कि जनता के दिलों पर राज करने वाले नेता हैं। लोणार नगरी ने एक बार फिर यह साबित किया है कि माइक पर बोलने वालों को सुना जरूर जाता है, लेकिन जनता के मन पर राज करने वालों को ही सच्चा नेता माना जाता है।

सामान्य युवाओं को अवसर देना, अपनी जेब से मदद कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना— यही भूषण भाऊ के नेतृत्व की आत्मा रही है। इसी वजह से वे केवल पदाधिकारी नहीं, बल्कि लोणार की जनता के अपने आदमी बन गए हैं।

इसी शांत, संस्कारयुक्त परिवार का आज का स्वर्णिम अध्याय हैं—
सौ. मीराताई भूषण मापारी, लोणार नगर परिषद की नगराध्यक्ष। जनता द्वारा चुनी गई मीराताई ने आज पदभार स्वीकार करते हुए सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि लोणार की जनता का अपार विश्वास अपने कंधों पर लिया है। संयमित स्वभाव, सबको साथ लेकर चलने की वृत्ति और सेवा भावना उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी ताकत है।

पद आते-जाते रहते हैं, सत्ता बदलती रहती है;
लेकिन शब्द का मान रखने वाला नेतृत्व, निभाए गए रिश्ते और बिना बोले किया गया काम समय के पार भी जीवित रहता है।

लोणार नगरी को मिला यह नेतृत्व जनता के मन पर अंकित एक अमिट छाप है।

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