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भोकरदन शहर की आयशा कॉलोनी (म्हाडा परिसर) में बिजली व्यवस्था का गंभीर संकट, 150 परिवारों का जीवन खतरे में

भोकरदन/करीम लाला 

भोकरदन शहर के म्हाडा परिसर से सटी आयशा कॉलोनी में करीब 100 से 150 परिवार निवास कर रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि आज तक इस कॉलोनी में एक भी बिजली का खंभा (पोल) नहीं लगाया गया है।

बिजली पाने के लिए नागरिकों को 500 से 1000 फीट दूर से तार खींचकर कनेक्शन लेना पड़ रहा है। केवल तारों पर ही 5 से 7 हजार रुपये तक का खर्च आ रहा है। ये तार सड़कों और गलियों से लटकते हुए गुजर रहे हैं, जिससे वाहनों के फंसने और बड़े हादसे का गंभीर खतरा बना हुआ है।

अतिरिक्त गंभीर समस्याएं

बरसात के मौसम में लटकती तारों से करंट फैलने का खतरा
छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हर समय जोखिम में
रात के अंधेरे में चोरी और असामाजिक तत्वों की परेशानी
बिजली फॉल्ट होने पर MSEB के कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते
कम-ज्यादा वोल्टेज से घरेलू उपकरण जलने की घटनाएं
आग लगने की आशंका, पूरी कॉलोनी खतरे में

महावितरण (MSEB, भोकरदन) की दोहरी भूमिका

एक ओर गरीब नागरिकों से 30,000 से 50,000 रुपये तक के बिजली बिल पूरी सख्ती से वसूले जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधा के रूप में जरूरी बिजली के खंभे लगाने में पूरी तरह लापरवाही बरती जा रही है।

कई बार आवेदन, फिर भी अनदेखी

स्थानीय नागरिकों और पत्रकार/सामाजिक कार्यकर्ता करीम लाला ने भोकरदन स्थित MSEB कार्यालय में कई बार आवेदन देकर कम से कम 3 बिजली खंभे लगाने की मांग की है। इसके बावजूद आज तक भोकरदन MSEB प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

MSEB (भोकरदन, जिला जालना) से सीधे सवाल

क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा?
क्या गरीब नागरिकों की जान की कोई कीमत नहीं है?
बिल वसूली में तत्परता, लेकिन सुविधाएं देने में टालमटोल क्यों?

नागरिकों की स्पष्ट मांग

आयशा कॉलोनी में तत्काल कम से कम 3 से 4 बिजली खंभे लगाए जाएं।
सुरक्षित और कानूनी बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएं।
भविष्य में यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी MSEB, भोकरदन की होगी।

अब नहीं तो कब?

भोकरदन शहर के नागरिक प्रशासन के जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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