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संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 449वीं जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई

कन्नड/अशरफ़ अली 

कन्नड शहर के इंदिरानगर चांभार टेकड़ी परिसर में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी चर्मकार समाज की ओर से संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 449वीं जयंती बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। सुबह 10 बजे संत गुरु रविदास महाराज की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

इस अवसर पर श्री रेणुका माता मंदिर संस्थान के अंतर्गत संचालित श्री विश्व माई वारकरी शिक्षण एवं आध्यात्मिक गुरुकुल के अध्यक्ष ह. भ. प. श्री विष्णुपंत महाराज काळे के जाहीर हरिकीर्तन का आयोजन किया गया। कीर्तन के माध्यम से संत गुरु रविदास महाराज के जीवन, विचार और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम में बताया गया कि संत गुरु रविदास महाराज 15वीं–16वीं शताब्दी की भक्ति आंदोलन के महान संत, कवि और समाज सुधारक थे। वाराणसी में जन्मे संत रविदास महाराज ने चर्मकार समाज में जन्म लेने के बावजूद अपनी भक्ति, ज्ञान और विचारों से समाज के सभी वर्गों में पूजनीय स्थान प्राप्त किया। उन्होंने समता, मानवता और अंधश्रद्धा निर्मूलन का संदेश दिया। उनके कई अभंग सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब में भी सम्मिलित हैं।

इस अवसर पर संस्थान के ह. भ. प. श्री शिवदत्त महाराज राजगुरु तथा गुरुकुल आश्रम के बाल गोपाल शिष्यों की उपस्थिति में संत गुरु रविदास महाराज के चरित्र का विस्तार से वर्णन किया गया।

कार्यक्रम में जयंती उत्सव समिति के अध्यक्ष श्री शेकुजी जयस्वाल, माजी नगरसेवक व खादी ग्राम उद्योग के चेयरमैन श्री राजेंद्र गव्हाणे, कल्याण पतसंस्था के अध्यक्ष श्री प्रदीप चिकसे, संस्था के संचालक श्री फुलसिंग घट्टरसिंग, श्री सतीश पद्मे, पंचायत समिति के श्री विजयजी वासने सहित अनेक सामाजिक, राजनीतिक व धार्मिक पदाधिकारी उपस्थित थे। साथ ही बड़ी संख्या में चर्मकार समाज के बंधु-भगिनी, महिलाएं और नागरिकों ने सहभाग लिया।

अंत में महाप्रसाद (अन्नदान) के आयोजन के साथ जयंती समारोह का समापन किया गया।

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