मां की मौत के बाद अनाथ हुए शावक को मिला सहारा, पत्रकार शेख जमीर बने मददगार — फिर से झुंड में लौटा पिल्ला

लोणार | फिरदोस खान पठाण
सुल्तानपुर क्षेत्र में 23 फरवरी को एक अज्ञात वाहन की टक्कर से एक मादा बंदर की मौत हो गई। यह घटना बेहद हृदयविदारक थी। हादसे के समय उसके साथ मौजूद छोटा शावक (पिल्ला) सौभाग्य से जीवित अवस्था में मिला। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पत्रकार शेख जमीर शेख मज्जीद ने तुरंत वन विभाग को सूचित किया।
सूचना प्राप्त होते ही वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शावक को अपने संरक्षण में लेकर लोणार स्थित मुख्यालय पहुंचाया। पशुधन विकास अधिकारी के मार्गदर्शन में शावक का प्राथमिक उपचार किया गया और उसकी विशेष देखरेख की गई।
इस बीच पत्रकार जमीर शेख ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कैलास चौधरी से संपर्क साधा। उनके निर्देश पर अभयसिंह पवार और माणिक कायंदे को तत्काल घटनास्थल पर भेजा गया और आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार शावक को उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने का निर्णय लिया गया। 24 फरवरी को सहायक वनसंरक्षक काकड़े तथा मेहकर के वनपरिक्षेत्र अधिकारी सातपुते के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया गया।
वन कर्मचारियों ने क्षेत्र में बंदरों के झुंड का पता लगाया। शावक की आवाज की मोबाइल में रिकॉर्डिंग कर ब्लूटूथ स्पीकर की सहायता से झुंड को पास बुलाया गया। इसके बाद शावक को झुंड के निकट छोड़ दिया गया। कुछ ही देर में एक मादा बंदर ने शावक को स्वीकार करते हुए अपने साथ ले लिया। झुंड द्वारा शावक को अपनाए जाने का दृश्य देखकर उपस्थित लोगों ने राहत की सांस ली।
पूरी कार्रवाई वन विभाग के नियमों और वन्यजीव संरक्षण के तहत की गई। इस अभियान में वनपाल फुके तथा वनरक्षक कैलास चौधरी (लोणार) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यह घटना वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और समय पर की गई मदद से एक जीवन बचाए जाने का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई।
