जालना मदरसा प्रकरण: शिक्षक अब्दुल रऊफ अंसारी का स्पष्टीकरण, जांच जारी; अफवाहों से बचने की अपील

जालना/कादरी हुसैन
जालना शहर में हाल ही में मदरसा और छात्रों से जुड़े एक मामले को लेकर विभिन्न प्रकार की खबरें और संदेश प्रसारित हो रहे हैं। इस बीच संबंधित पक्षों द्वारा आधिकारिक रूप से स्पष्टीकरण जारी कर पूरे मामले को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है। साथ ही, प्रशासनिक स्तर पर भी जांच प्रक्रिया जारी है।
परिवार की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना
30 अप्रैल 2026 को श्री कलीम अंसारी (संबंधित शिक्षक के पुत्र) द्वारा जारी ‘पब्लिक नोटिस’ में बताया गया कि जिन बच्चों का उल्लेख किया जा रहा है, वे पहले से ही उसी शिक्षक के मार्गदर्शन में पढ़ रहे थे और उनका संबंध नया नहीं है।
नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया कि बच्चों के माता-पिता/अभिभावकों ने स्वेच्छा से उन्हें शिक्षा के उद्देश्य से शिक्षक के पास भेजा था।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की गलत मंशा नहीं थी, हालांकि मामले की जांच संबंधित प्राधिकरणों द्वारा की जा रही है, जिसका पूरा सम्मान किया जा रहा है। वर्तमान में यह मामला बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के समक्ष विचाराधीन है और परिवार द्वारा पूर्ण सहयोग किया जा रहा है।
सार्वजनिक नोटिस में लोगों से अपील की गई है कि वे अपुष्ट या भ्रामक जानकारी साझा न करें, बिना आधिकारिक निष्कर्ष के किसी प्रकार की धारणा न बनाएं तथा बच्चों और उनके परिवारों की निजता और गरिमा का सम्मान करें। साथ ही चेतावनी दी गई है कि गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
शिक्षक अब्दुल रऊफ अंसारी का व्यक्तिगत बयान
1 मई 2026 को शिक्षक अब्दुल रऊफ सरवरअली अंसारी ने अपना विस्तृत पक्ष रखते हुए बताया कि वे वर्ष 2002 से मदरसा शिक्षा से जुड़े हैं और करीब 9 वर्षों तक एक मदरसे में शिक्षक के रूप में कार्य कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि कुछ आंतरिक कारणों और सम्मान की कमी के चलते उन्होंने संस्था छोड़ी थी, लेकिन वर्ष 2022-23 में पुनः अनुरोध पर कार्यभार संभाला।
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि कार्यकाल के दौरान उन्होंने छात्रों के भोजन, रहने की व्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर कई मुद्दे उठाए, लेकिन संतोषजनक सुधार न होने के कारण उन्होंने संस्था छोड़ने का निर्णय लिया। इसके बाद वे बेहतर सुविधाओं के साथ नया मदरसा शुरू करने की योजना बना रहे थे।
अंसारी के अनुसार, उनके पास पढ़ रहे छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ पहले से विश्वास का संबंध था, और कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को आगे भी उनके मार्गदर्शन में पढ़ाने की इच्छा जताई थी।
आरोप और स्थिति स्पष्ट
उन्होंने बताया कि रमजान के दौरान छात्र अपने घर गए हुए थे, उसी बीच उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।
वित्तीय मामलों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी बिना संस्था की अनुमति के कोई चंदा या धन संग्रह नहीं किया। सभी लेन-देन संस्था के निर्देशानुसार ही किए गए और उसका पूरा रिकॉर्ड संस्था के पास उपलब्ध है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी भूमिका केवल शिक्षण और छात्र मार्गदर्शन तक सीमित रही है और वे किसी भी प्रकार के वित्तीय प्रबंधन या ट्रस्ट से जुड़े कार्यों के जिम्मेदार नहीं थे।
रजा अकादमी को सौंपा गया निवेदन
अंसारी ने मुंबई स्थित Raza Academy को पत्र लिखकर मामले में निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि इनसे उनकी सामाजिक और धार्मिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मामला संस्थागत मतभेदों के कारण उत्पन्न हुआ हो सकता है।
उन्होंने अकादमी से अनुरोध किया है कि बिना सत्यापन किसी की छवि खराब न हो, और यदि कोई गलतफहमी है तो उसे दूर कर सभी की गरिमा बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
जांच जारी, सहयोग का आश्वासन
अब्दुल रऊफ अंसारी ने कानून और जांच प्रक्रिया के प्रति पूर्ण सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं और जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
निष्कर्ष
फिलहाल यह मामला जांचाधीन है और अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकरणों द्वारा ही लिया जाएगा। प्रशासन और संबंधित पक्षों ने आम जनता से संयम बरतने और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है।