औरंगाबाद में करोड़ों की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का भंडाफोड़, आर्थिक अपराध शाखा की बड़ी कार्रवाई

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औरंगाबाद में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने करोड़ों रुपये की जमीनों की फर्जी रजिस्ट्री करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि इस गिरोह ने नकली आधार कार्ड का इस्तेमाल कर और ऑनलाइन प्रणाली को दरकिनार करते हुए ऑफलाइन तरीके से जमीनों की फर्जी रजिस्ट्री कराई। मामले के मुख्य आरोपी हबीब सालेह हबीब अहमद (मूल निवासी मालेगांव, वर्तमान निवासी महमूदपुरा) को पुलिस ने घटनास्थल पर ले जाकर पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (सीन रिक्रिएशन) किया।
पुलिस जांच में सामने आया कि हिरापुर स्थित 2 हेक्टेयर 11 आर कृषि भूमि के वास्तविक मालिक अली असगर पेटीवाला की जगह हबीब को फर्जी मालिक बनाकर कथित रूप से एक फर्जी ‘हिबानामा’ तैयार किया गया। पुलिस के अनुसार, हबीब केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ा है और उसे ठीक से पढ़ना-लिखना भी नहीं आता। इसके बावजूद भूमाफिया और मुख्य एजेंट अब्दुल काशिद उर्फ जुनेद के संपर्क में आने के बाद वह इस गिरोह का प्रमुख मोहरा बन गया।
जांच में यह भी सामने आया कि हबीब कथित तौर पर 50 हजार रुपये के बदले करोड़ों रुपये मूल्य की जमीनों का मालिक बनकर उप-पंजीयक कार्यालय में उपस्थित होता था। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि वह अब तक 7 से 8 बार इसी तरह फर्जी मालिक बनकर रजिस्ट्री प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है।
इस मामले में अब तक मोहम्मद नूर, एजेंट जुनेद खान, फर्जी मालिक हबीब तथा नकली आधार कार्ड तैयार करने के आरोप में एक ज़ेरॉक्स सेंटर संचालक शोहेब खान सादुल्ला खान सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
रजिस्ट्री कार्यालय में घटनाक्रम का कराया गया पुनर्निर्माण
आर्थिक अपराध शाखा ने न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद मुख्य आरोपी हबीब को सीधे उप-पंजीयक कार्यालय ले जाकर 27 मई को हुई दस्तावेज़ पंजीकरण प्रक्रिया का घटनास्थल पर पुनर्निर्माण कराया। पुलिस ने यह जांच की कि आरोपी किस स्थान पर खड़ा था, किन अधिकारियों के सामने उसने अंगूठा लगाया और पूरी प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई।
पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस कथित फर्जीवाड़े में रजिस्ट्री कार्यालय के किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही। मामले की जांच पुलिस निरीक्षक गजानन कल्याणकर, उपनिरीक्षक सचिन देशमुख और अभिजीत गायकवाड़ की टीम द्वारा की जा रही है।
