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एनरोलमेंट की रजिस्ट्रेशन फीस 750 से बढ़ाकर 22,500 रुपये करने का प्रस्ताव? जालना की दो वकील संगठनों का बार काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष कड़ा विरोध

जालना | कादरी हुसैन

बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट एडवोकेट अमेंडमेंट बिल, 2026 में एनरोलमेंट रजिस्ट्रेशन फीस में की गई भारी बढ़ोतरी का जालना की जिला वकील संघ, जालना और मराठवाड़ा क्लेम प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन, जालना ने कड़ा विरोध किया है। दोनों संगठनों ने आज बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन को ई-मेल के माध्यम से लिखित आपत्ति और सुझाव भेजे हैं।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, वकील के रूप में एनरोलमेंट के समय वर्तमान में 750 रुपये निर्धारित फीस को सीधे 22,500 रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसमें 18,000 रुपये स्टेट बार काउंसिल और 4,500 रुपये बार काउंसिल ऑफ इंडिया को देने होंगे। 750 रुपये से सीधे 30 गुना बढ़ोतरी करना पूरी तरह असहनीय और अन्यायपूर्ण है, ऐसा दोनों संगठनों का कहना है।

जिला वकील संघ, जालना की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अधिकांश कानून के विद्यार्थी ग्रामीण और तहसील क्षेत्रों के किसान परिवारों से आते हैं। पहले से ही निजी लॉ कॉलेजों की लाखों रुपये की फीस और बाहर के लॉ क्लासेस के खर्च के कारण विद्यार्थी आर्थिक दबाव में हैं। ऐसे में 22,500 रुपये की एनरोलमेंट फीस देना उनके लिए संभव नहीं होगा।

मराठवाड़ा क्लेम प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ने भी इसी मुद्दे को उठाया है। संगठन के अध्यक्ष एडवोकेट दत्तात्रय पा. पाटील, उपाध्यक्ष एडवोकेट किशोर एस. राऊत और सदस्य एडवोकेट महेश धन्नावत ने कहा कि फीस में 30 गुना बढ़ोतरी से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए वकालत के क्षेत्र में प्रवेश के दरवाजे बंद हो जाएंगे।

दोनों संगठनों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष कई सुझाव रखे हैं। उनके अनुसार, एनरोलमेंट फीस कम से कम 4,000 से 5,000 रुपये होनी चाहिए और यह राशि केवल स्टेट बार काउंसिल के लिए निर्धारित की जानी चाहिए। भविष्य में फीस में बढ़ोतरी करनी हो तो हर 10 वर्ष में अधिकतम 10 से 20 प्रतिशत तक ही बढ़ोतरी की जाए और यह निर्णय स्टेट बार काउंसिल तथा डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन की सलाह से लिया जाए।

इसके अलावा, स्टेट बार काउंसिल में सदस्यों की संख्या 25 से बढ़ाकर 33 करने पर दोनों संगठनों को कोई आपत्ति नहीं है। वहीं, चुनाव के लिए रीजनल कॉन्स्टिट्यूएंसी की व्यवस्था ही उचित है और स्टेट लेवल कॉन्स्टिट्यूएंसी स्वीकार नहीं है, ऐसी भूमिका भी दोनों संगठनों ने स्पष्ट की है।

इस संबंध में जिला वकील संघ, जालना के अध्यक्ष एडवोकेट परमेश्वर अशोकराव गडगिळे और मराठवाड़ा क्लेम प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट दत्तात्रय पा. पाटील ने कहा कि यदि वकालत का पेशा केवल अमीर लोगों तक सीमित रह गया, तो न्याय व्यवस्था में आम और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की आवाज हमेशा के लिए दब जाएगी।

दोनों संगठनों ने मांग की है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया उनकी आपत्तियों और सुझावों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए प्रस्तावित विधेयक में आवश्यक बदलाव करे।

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