औरंगाबाद जिला परिषद में भाजपा बैनर पर सियासी विवाद, अंबादास दानवे ने जताई आपत्ति

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
औरंगाबाद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा किसानों के लिए कर्जमाफी और बिजली बिल माफी की घोषणा के बाद भाजपा की ओर से जगह-जगह स्वागत और बधाई के बैनर लगाए जा रहे हैं। इसी बीच औरंगाबाद जिला परिषद के मुख्य कार्यालय में लगाए गए भाजपा के बैनरों को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक अंबादास दानवे ने जिला परिषद कार्यालय पहुंचने पर सरकारी परिसर में लगाए गए राजनीतिक बैनरों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने जिला परिषद अध्यक्ष अविनाश गलांडे के सामने ही कहा कि किसी भी सरकारी कार्यालय में राजनीतिक दलों के बैनर नहीं लगाए जाने चाहिए।
दानवे ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस का फोटो किसी सरकारी बैनर पर होना समझा जा सकता है, लेकिन सरकारी कार्यालय में किसी राजनीतिक दल के बैनर लगाना उचित नहीं है। वहीं जिला परिषद अध्यक्ष अविनाश गलांडे ने इसका बचाव करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में ऐतिहासिक फैसले लिए हैं, ऐसे में उनके कार्यों का अभिनंदन करने में कोई गलत बात नहीं है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के जन्मदिन के अवसर पर जिला परिषद कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार और परिसर में लगाए गए भाजपा के बधाई बैनरों में मुख्यमंत्री के कार्यों का उल्लेख किया गया है। इन बैनरों में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े का फोटो भी शामिल है। इसी को लेकर विधायक अंबादास दानवे ने जिला परिषद में सत्तारूढ़ भाजपा की भूमिका पर नाराजगी व्यक्त की।
दानवे का कहना है कि जिला परिषद एक सरकारी कार्यालय है और वहां किसी भी राजनीतिक दल के बैनर लगाना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री के रूप में उनका फोटो लगाया जा सकता है, लेकिन पार्टी के बैनर सरकारी परिसर में नहीं होने चाहिए। दूसरी ओर जिला परिषद अध्यक्ष अविनाश गलांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा किसानों के लिए लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों और उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में ये बैनर लगाए गए हैं।
इस विवाद के बाद सरकारी कार्यालयों में राजनीतिक बैनर लगाने के मुद्दे पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
डीपीडीसी निधि पर भी दानवे ने उठाए सवाल
विधायक अंबादास दानवे ने जिला नियोजन एवं विकास समिति (डीपीडीसी) के तहत मिलने वाले फंड के वितरण को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस निधि की योजना बनाने और उसका उपयोग करने का अधिकार जिला परिषद के पास ही होना चाहिए। यह निधि किसी व्यक्ति या पालकमंत्री की निजी संपत्ति नहीं है।
उन्होंने कहा कि डीपीडीसी से जिला परिषद को मिलने वाली राशि का 40 प्रतिशत विधायकों को देने के बजाय पूरा फंड सीधे जिला परिषद को दिया जाना चाहिए। विधायकों के पास पहले से विधायक निधि और अन्य योजनाओं के फंड उपलब्ध हैं, इसलिए जिला परिषद के निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही इस राशि की योजना बनाने का अधिकार मिलना चाहिए।
दानवे ने यह भी कहा कि जिला परिषद की नई इमारत के लिए गुणवत्तापूर्ण फर्नीचर की आवश्यकता है और इसका विरोध करने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि स्कूलों की मरम्मत भी बेहद जरूरी है, लेकिन उसके लिए डीपीडीसी, सीएसआर और अन्य माध्यमों से अलग से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।