कुणबी जात प्रमाणपत्र रद्द होने पर भड़के मनोज जरांगे, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

जालना | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
कुणबी जात प्रमाणपत्रों को अवैध घोषित कर रद्द किए जाने के मुद्दे पर मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। अंतरवाली सराटी में प्रमाणपत्र रद्द होने से प्रभावित लोगों से मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि मराठा समाज के साथ अन्याय किया जा रहा है।
जरांगे पाटील ने दावा किया कि उनके खिलाफ बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है और उन्हें आंदोलन से अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले का जल्द खुलासा करेंगे और सभी तथ्यों को जनता के सामने लाएंगे। उन्होंने भाजपा के मराठा नेताओं से भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की अपील करते हुए कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि यदि मराठा समाज के युवाओं के अधिकारों पर हमला किया गया तो समाज चुप नहीं बैठेगा और वर्ष 2029 के चुनाव में इसका जवाब दिया जाएगा।
ज्योति दहिहंडे प्रकरण का उल्लेख करते हुए जरांगे पाटील ने कहा कि संबंधित परिवार को पूर्व में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र जारी किया गया था और उसी आधार पर परिवार के सदस्य ने आरक्षण के तहत पॉलिटेक्निक में प्रवेश भी लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अब प्रमाणपत्र रद्द किए जा रहे हैं तो ऐसे मामलों का क्या होगा और क्या इसी उपनाम वाले सभी लोगों के प्रमाणपत्र भी रद्द किए जाएंगे।
मनोज जरांगे ने आरोप लगाया कि केवल राजनीतिक कारणों से हजारों लोगों का भविष्य दांव पर लगाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे के कहने पर ही प्रमाणपत्र रद्द किए गए हैं। इसी के साथ उन्होंने चंद्रशेखर बावनकुळे की नार्को टेस्ट कराने की मांग भी की।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी निशाना साधते हुए जरांगे पाटील ने कहा कि मराठा समाज ने उनके राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन अब वही सरकार मराठा समाज के हितों के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और उसके कुछ जनप्रतिनिधि मराठा आरक्षण के विरोध में काम कर रहे हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
