औरंगाबाद: 1.65 करोड़ खर्च, 3900 पौधों का दावा; जांच में हजार भी नहीं मिले, वृक्षारोपण घोटाला

औरंगाबाद | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा दो वर्ष पहले सरकारी आदेश के तहत जिले में करोड़ों रुपये की वृक्षारोपण योजना शुरू की गई थी। इसके तहत अकेले फुलंब्री तहसील के चार स्थानों पर लगभग 4,200 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था। विभाग ने 3,900 पौधे लगाए जाने का दावा किया, लेकिन मौके पर हुई जांच में एक हजार पौधे भी नहीं मिले। इनमें से भी केवल 15 से 20 प्रतिशत पौधे ही जीवित पाए गए। इस कार्य पर करीब 1 करोड़ 65 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्यारंभ आदेश जारी कर दिए गए थे, लेकिन वृक्षारोपण का काम करीब एक वर्ष बाद 2025 में शुरू किया गया। पिछले वर्ष चार ठेकेदारों के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर पौधे लगाए गए।
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार लगभग 5 फीट ऊंचाई वाले देशी पौधे लगाए जाने थे, लेकिन कई स्थानों पर विदेशी प्रजाति के पौधे भी लगाए गए। अधिक ऑक्सीजन देने वाले देशी पौधों को प्राथमिकता नहीं दिए जाने का भी आरोप है।
PWD अधिकारियों ने तेजस एजेंसी को 4,200 पौधे लगाने का लक्ष्य दिया था और 3,900 पौधे लगाए जाने का दावा किया। हालांकि, स्थल निरीक्षण में कई दावे गलत साबित हुए। एक स्थान पर जहां 1,000 पौधे लगाए जाने का दावा किया गया था, वहां केवल 233 पौधे मिले। वहीं, जिस सड़क पर 2,544 पौधे लगाए जाने की बात कही गई थी, वहां सिर्फ 386 पौधे ही पाए गए।
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि सड़क किनारे लगाए गए पौधों में केवल लगभग 10 प्रतिशत ही जीवित थे, जबकि सरकारी विश्रामगृह और सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय परिसर में 40 से 50 प्रतिशत पौधे जीवित पाए गए।
जांच टीम ने फुलंब्री के वाणेगांव-शिवरी मार्ग, शक्कर कारखाना-निधोना मार्ग और सार्वजनिक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस परिसर सहित तीन स्थानों का निरीक्षण किया। इन तीनों स्थानों पर कुल मिलाकर एक हजार पौधे भी नहीं मिले।
विभाग ने वर्ष 2024 में जिले में 30,600 पौधे लगाने और तीन वर्षों तक उनके रखरखाव के लिए 12 करोड़ 47 लाख रुपये की निविदा जारी की थी। इस आधार पर एक पौधे की लागत लगभग 4,100 रुपये बैठती है। अब वृक्षारोपण के दावों और वास्तविक स्थिति में सामने आए अंतर को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
