औरंगाबाद में फर्जी पैथोलॉजी लैब का सनसनीखेज खुलासा! झारखंड के डॉक्टर के नाम पर जारी हो रही थीं गलत रिपोर्टें, मरीजों की जान से खिलवाड़

औरंगाबाद में मेडिकल सेक्टर से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर में एक फर्जी पैथोलॉजी लैब लंबे समय से चल रही थी, जो झारखंड के एक डॉक्टर के नाम और फर्जी सिग्नेचर का इस्तेमाल कर लोगों को टेस्ट रिपोर्ट दे रही थी। यह खुलासा होते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए लैब को सील कर दिया।
⚠️ झूठी रिपोर्ट, असली खतरा
जांच में पता चला कि यह लैब बिना किसी वैध मेडिकल लाइसेंस के ऑपरेट हो रही थी और वहां कोई अधिकृत पैथोलॉजिस्ट या डॉक्टर मौजूद नहीं था। रिपोर्टों पर झारखंड के पंजीकृत डॉक्टर का नाम और सिग्नेचर फर्जी तरीके से लगाए जाते थे ताकि लोगों को विश्वास दिलाया जा सके कि रिपोर्ट भरोसेमंद है। दरअसल, वह डॉक्टर न तो कभी उस लैब में आया था, न ही उसे इसकी जानकारी थी।
🔬 मरीजों की ज़िंदगी से खिलवाड़
लैब में ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, थायरॉइड, शुगर और अन्य बीमारियों की रिपोर्टें बनाई जा रही थीं। कई मरीजों की रिपोर्ट गलत आई, जिससे उनका इलाज या तो गलत दिशा में गया या समय पर शुरू ही नहीं हो पाया। यह सीधे तौर पर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ था।
🕵️♂️ ऐसे हुआ पर्दाफाश
स्वास्थ्य विभाग को गुप्त रूप से एक शिकायत मिली थी कि शहर के एक मोहल्ले में चल रही लैब में बिना डॉक्टर की मौजूदगी के रिपोर्टें बनाई जा रही हैं। इसके बाद अधिकारियों ने अचानक छापेमारी की। लैब में डॉक्टर का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं था, और जब रिपोर्टें देखी गईं तो उसमें झारखंड के डॉक्टर के दस्तखत पाए गए — जो पूरी तरह फर्जी थे।
🧾 दस्तावेज भी निकले फर्जी
जांच टीम को लैब में जो दस्तावेज मिले, वे भी अवैध निकले। न कोई NABL सर्टिफिकेशन, न कोई मेडिकल काउंसिल अप्रूवल। यहां तक कि कई मरीजों की रिपोर्ट एक ही टेम्पलेट पर कॉपी-पेस्ट करके तैयार की जाती थी।
👮♂️ आरोपी फरार, पुलिस तलाश में
लैब संचालक मौके से फरार हो गया है। पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है। उस पर IPC की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जिसमें धोखाधड़ी, जनस्वास्थ्य को खतरे में डालना और दस्तावेजों की जालसाजी शामिल है।
🔊 प्रशासन की चेतावनी
स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। सभी निजी लैब्स का रजिस्ट्रेशन और मान्यता की दोबारा जांच की जाएगी। यदि कोई भी लैब बिना मान्यता के ऑपरेट करती पाई गई तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
📣 नागरिकों से अपील:
- किसी भी लैब से रिपोर्ट लेने से पहले उसके सर्टिफिकेट और डॉक्टर की मौजूदगी की पुष्टि करें।
- संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य अधिकारी या पुलिस को सूचित करें।
- स्वास्थ्य से जुड़ा कोई समझौता आपके जीवन पर भारी पड़ सकता है।
यह घटना सिर्फ एक लैब की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को झकझोर देने वाली चेतावनी है। सवाल यह है कि जब तक कोई हादसा न हो जाए, तब तक ऐसे झोलाछाप कारोबारियों को खुली छूट क्यों मिलती है? औरंगाबाद की यह घटना पूरे महाराष्ट्र को चेताने वाली है।
