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मोहन भागवत के बयान पर भड़के ओवैसी, कहा – मुसलमानों को लेकर आरएसएस का रवैया पाखंडी और बेमतलब

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा मुसलमानों को लेकर दिए गए हालिया बयान पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों के प्रति समय-समय पर आरएसएस प्रमुख की ओर से दिए जाने वाले ‘शांतिदायक’ बयान दरअसल पाखंड से भरे होते हैं और इनका कोई मतलब नहीं होता।

‘शांतिदायक बयान सिर्फ दिखावा’
पीटीआई को दिए इंटरव्यू में ओवैसी ने कहा, “मुसलमानों के लिए जो सौहार्द्रपूर्ण बातें कही जाती हैं, वो दिखावटी हैं। अगर ऐसा नहीं होता, तो संघ और उससे जुड़े संगठन हर मुद्दे पर मुसलमानों को निशाना नहीं बनाते।” उन्होंने 2024 में मोहन भागवत के उस बयान का हवाला भी दिया, जिसमें भागवत ने मंदिर-मस्जिद विवादों को राजनीतिक फायदे के लिए गलत बताया था।

बीजेपी की जीत पर विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया
ओवैसी ने बीजेपी की चुनावी सफलता के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “अगर बीजेपी को 240 सीटें मिलती हैं, तो क्या इसके लिए मैं जिम्मेदार हूं? बीजेपी इसलिए जीत रही है क्योंकि विपक्ष विफल हो गया है और उन्होंने हिंदू वोटों को बीजेपी के पक्ष में एकजुट होने दिया है।”

‘हमें सिर्फ वोट बैंक की तरह देखा जाता है’
ओवैसी ने कहा कि विपक्षी दलों ने उन्हें ‘बीजेपी की बी-टीम’ कहकर बदनाम करने की कोशिश की, जबकि हकीकत ये है कि वे केवल मुसलमानों की राजनीतिक भागीदारी की बात करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष मुस्लिम वोट को सिर्फ चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहता है, लेकिन उनके मुद्दों पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जाती।

‘नेता हमेशा ऊंची जातियों से क्यों, मुसलमान भिखारी क्यों?’
ओवैसी ने विपक्षी दलों पर जातीय राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा, “जब यादव नेता हो सकते हैं, ऊंची जाति के लोग मुख्यमंत्री बन सकते हैं, तो मुसलमानों को भी नेतृत्व क्यों नहीं मिल सकता? क्या मुसलमान सिर्फ भिखारी ही रहेंगे?” उन्होंने यह भी कहा कि सभी विपक्षी दलों — कांग्रेस, बसपा, सपा — पर यह आरोप लागू होता है।

‘मुसलमानों की भागीदारी के बिना विकसित भारत संभव नहीं’
असदुद्दीन ओवैसी ने जोर देकर कहा कि भारत मुसलमानों जैसे बड़े समुदाय को किनारे रखकर 2047 तक ‘विकसित भारत’ का सपना पूरा नहीं कर सकता। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि मुसलमानों को केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि एक भागीदार के रूप में देखें और उनके विकास, शिक्षा और रोजगार के लिए ठोस कदम उठाएं।

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