परभणी : ऐतिहासिक उरूस में ‘दिल्ली का पराठा’ का अनोखा आकर्षण

परभणी के ऐतिहासिक उरूस में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों की भरमार होती है। इनमें से एक ऐसा खास पदार्थ है, जो पिछले 60 से 65 वर्षों से खाने के शौकीनों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, और वह है ‘दिल्ली का पराठा’। इस पराठे की खासियत है इसके साथ मिलने वाला मीठा शिरा और खस्ता पूरी।
इतिहास पर नजर डालें तो यह पदार्थ मूल रूप से मुगलकालीन राजाओं के रसोईघर में तैयार किया जाता था। मुगल साम्राज्य के राजाओं को यह पदार्थ विशेष प्रिय था। बाद में यह दिल्ली की गलियों में प्रसिद्ध हुआ और ‘दिल्ली का पराठा’ के नाम से जाना जाने लगा। आज भी दिल्ली समेत देशभर के कई हिस्सों में यह पदार्थ लोकप्रिय है।
हालांकि, परभणी के उरूस में इस पराठे को एक अलग ही पहचान मिली है। हर साल यात्रा के दौरान इस पराठे के असंख्य स्टॉल लगते हैं। इन स्टॉल्स पर लाल और पीले रंग के झंडों के साथ पारंपरिक तरीके से यह पदार्थ बनाया जाता है। इस पराठे के स्वाद का आनंद लेने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। परभणी के उरूस में ‘दिल्ली का पराठा’ सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं है, बल्कि यह इतिहास, परंपरा और स्वाद का एक अनोखा संगम है।
पराठे के अनोखे स्वाद का रहस्य इसकी पारंपरिक तैयारी की विधि में छिपा है। मैदा और वनस्पति घी के मिश्रण से इसका आटा गूंथा जाता है। इस आटे को कम से कम 2 से 3 घंटे तक भिगोकर रखा जाता है, फिर इसे बड़ी-बड़ी पूरियों के रूप में बेला जाता है। इन पूरियों को तेल में तला जाता है। पराठे को मीठा स्वाद देने वाला शिरा इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। रवा, वनस्पति घी और चीनी के मिश्रण से शिरा तैयार किया जाता है। इस शिरे को धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे इसे एक खास स्वाद मिलता है।
मोहम्मद फुरकान 1983 से परभणी के उरूस में ‘दिल्ली का पराठा’ बेच रहे हैं, और अब यह व्यवसाय उनकी तीसरी पीढ़ी तक पहुंच चुका है। परभणी में इस पराठे का प्रवेश 1965 में हुआ, जब मोहम्मद फुरकान के दादा जमील अहमद ने पहली बार उरूस में अपना स्टॉल लगाया। उसके बाद इस विरासत को उनके पिता मोहम्मद इस्तियाक ने आगे बढ़ाया, और अब मोहम्मद फुरकान अपने परिवार की मदद से इस खाद्य परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
परभणी के उरूस में ‘दिल्ली का पराठा’ न सिर्फ एक स्वादिष्ट व्यंजन है, बल्कि यह एक ऐसी परंपरा है जो इतिहास और संस्कृति को जीवंत रखती है। यह पदार्थ न केवल लोगों के दिलों को जीतता है, बल्कि उन्हें एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।
