मंगलुरु मॉब लिंचिंग: पुलिस ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ नारे के दावे को किया खारिज, तीन पुलिसकर्मी निलंबित

मंगलुरु के कुदुपु गांव में हुई मॉब लिंचिंग की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। मृतक अशरफ पर कथित ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ नारा लगाने का आरोप लगाकर भीड़ ने उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। लेकिन अब पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है—ऐसे किसी नारे के सबूत उन्हें नहीं मिले हैं।
पुलिस आयुक्त की सफाई
शहर के पुलिस आयुक्त अनुपम अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने का दावा निराधार है और इस संबंध में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने कहा, “हमारे पास ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि मृतक ने पाकिस्तान के समर्थन में नारा लगाया।”
क्या है मामला?
27 अप्रैल को अशरफ नामक युवक, जो केरल के वायनाड का निवासी था, कुदुपु गांव में एक क्रिकेट टूर्नामेंट के पास से गुजर रहा था। तभी उस पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने का आरोप लगा और 25-30 लोगों की भीड़ ने उस पर डंडों और बल्लों से हमला कर दिया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
परिवार का दावा
अशरफ के परिवार और कुछ संगठनों ने कहा है कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ था और यह नारा लगाने का आरोप भीड़ द्वारा हिंसा को जायज ठहराने की साज़िश हो सकती है। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, झगड़ा तब शुरू हुआ जब अशरफ ने एक गिलास से पानी पिया।
तीन पुलिसकर्मी निलंबित
इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में तीन पुलिसकर्मी—इंस्पेक्टर शिवकुमार के.आर., हेड कॉन्स्टेबल चंद्रा पी., और कॉन्स्टेबल यल्लालिंगा को निलंबित कर दिया गया है। इन पर आरोप है कि उन्हें घटना की जानकारी होने के बावजूद वे समय पर कार्रवाई नहीं कर पाए और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित नहीं किया।
अब तक 21 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने अब तक इस मामले में 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी ऑटो चालक सचिन टी. समेत कई स्थानीय लोग शामिल हैं। पुलिस की जांच सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान के आधार पर जारी है।
बड़ा सवाल
घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि बिना किसी पुष्ट जानकारी के केवल एक आरोप के आधार पर किसी को भीड़ द्वारा मार डालना क्या न्यायसंगत है? और क्या मीडिया द्वारा फैलाई गई अधूरी या भ्रामक सूचनाएं भी इस तरह की हिंसा को हवा देती हैं?
